मां उमा-शंकरी की डोली यात्रा और अपने धर्म भाई आराध्य लाटू देवता के साथ 12 वर्षों के बाद 16 दिनों के प्रवास के लिए अपने मायके डिम्मर गांव पहुंची। यहां सैकड़ों की संख्या में ध्याणियों, देश और विदेश से आए प्रवासियों और ग्रामीणों ने मां उमा देवी का गाजे-बाजे और फूल-मालाओं से भव्य स्वागत किया।
सोमवार को मां उमा देवी की डोली यात्रा ने रात्रि प्रवास नाकोट गांव में किया। मंगलवार सुबह आचार्यों और ग्रामीणों ने माता की पूजा की। दोपहर को डोली यात्रा को नाकोट के ग्रामीणों ने डिम्मर गांव की सीमा तक विदा किया। डिम्मर गांव के आलीगदेरे मंदिर के समीप डोली यात्रा की अगवानी के लिए सैकड़ों श्रद्धालु सुबह से ही पलक-पावड़े बिछाकर खड़े थे।
मां उमा देवी ने जैसे ही अपने मायके डिम्मर गांव की सीमा में प्रवेश किया तो इंतजार में खड़े ध्याणियों और ग्रामीणों के खुशी के आंसू झलक गए। मां उमा ने ध्याणियों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद दिया और आलीगदेरा में स्थित पौराणिक उमा देवी के मंदिर की परिक्रमा की।
समीपवर्ती खेतों में स्थित मां उमा के आली सेरे (खेत) में जाकर पत्थर की शिला पर बने मां उमा की पौराणिक चौकी की परिक्रमा की। इसके बाद खल्दार स्थित अपनी बड़ी बहिन शक्ति माता से भेंटकर चौरीचौक के खांडू देवता के मंदिर में 15 दिनों के लिए प्रतिस्थापित हुईं।
इस दौरान आचार्यों ने वैदिक मंत्रोच्चारों के साथ देवी की पूजा की। महिलाओं ने मांगल और जागर गीतों से माता की स्तुति की। देवी के जयकारों से संपूर्ण क्षेत्र देवीमय हो गया। देवी के पश्वाओं ने देवनृत्य कर श्रद्धालुओं को सुख समृद्धि का आशीर्वाद दिया। उमा देवी समिति डिम्मर ने प्रसाद बांटा।
इस मौके पर उमा देवी समिति के प्रबंधक नरेंद्र सिंह भंडारी, अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह पुंडीर, पुजारी अजय पुजारी, राजेंद्र पुजारी, शैलेंद्र प्रसाद डिमरी, प्रणवेंद्र प्रसाद डिमरी, प्रभुकांत डिमरी, दिनेश चंद्र सहित डिम्मर, माखोली, सैंण, भभराड़ी, कर्णप्रयाग, सिमली, गौचर, लंगासू, गोपेश्वर सहित देश और विदेशों से आई ध्याणियों और श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन कर पुण्य अर्जित किया।