डीएम ने प्रभारी जिला युवा कल्याण अधिकारी शांतिप्रसाद आर्या और तत्कालीन प्रधान सहायक चित्रा पांडे को निलंबित करने की संस्तुति कर दी है। जिला युवा कल्याण एवं पीआरडी विभाग द्वारा तैनात किए गए स्वयंसेवकों के मानदेय भुगतान में घोर लापरवाही का आरोप है। डीएम ने जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर यह संस्तुति की है।
डीएम मंगेश घिल्डियाल ने बताया कि जिला युवा कल्याण एवं पीआरडी अधिकारी बागेश्वर के स्तर से युवा कल्याण विभाग द्वारा तैनात किए जाने वाले स्वयंसेवकों के मानदेय के लिए जिला योजना 2016-17 में रखा गया बजट पहले तीन महीनों के लिए निर्धारित था, लेकिन विभागों में अधिक स्वयंसेवकों की तैनाती कर दी गई। मामले की शिकायत मिलने पर इसकी जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया गया।
जांच कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार दिसंबर 2015 से मार्च 2016 तक तैनात किए गए 384 स्वयंसेवकों की तैनाती बिना प्रस्ताव और बिना स्वीकृति के ही कर दी गई। जांच के दौरान विभाग इसमें कोई अभिलेख भी प्रस्तुत नहीं कर सका। जांच रिपोर्ट में विभाग की ओर से लंबे समय तक 139 अप्रशिक्षित स्वयंसेवकों से मानदेय पर कार्य कराने का मामला भी सामने आया है, लेकिन इन अप्रशिक्षित स्वयंसेवकों की तैनाती किस आधार पर की गई यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है। जांच रिपोर्ट के अनुसार सात विभागों के स्वयंसेवकों की कम उपस्थिति की सूचना के बाद भी अधिक मानदेय का भुगतान किया गया है।
इतना ही नहीं एक ही स्वयंसेवक को माह में दो बार मानदेय का भुगतान करने का मामला भी पकड़ में आया। डीएम का कहना है कि जिला युवा कल्याण एवं पीआरडी अधिकारी और तत्कालीन प्रधान सहायक ने उच्चाधिकारियों को गुमराह कर शासकीय हित में घोर लापरवाही की है। यह शासकीय धन के दुरुपयोग का मामला है। जांच कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार प्रधान सहायक ने 15 जुलाई 2016 को अल्मोड़ा के लिए कार्यमुक्त होने के बावजूद चार्ज हस्तांतरण की कार्रवाई पूरी नहीं की है। डीएम ने इसे शासकीय हित में घोर लापरवाही बताते हुए दोनों के निलंबन की संस्तुति की है।