बागेश्वर। जिला अस्पताल बागेश्वर में लापरवाही का एक बड़ा मामला सामने आया है। अस्पताल की छत से पानी के रिसाव (सीपेज) को रोकने और बेड की क्षमता बढ़ाने के लिए तीसरी मंजिल पर एक करोड़ की लागत से 32 बेड का अत्याधुनिक अतिरिक्त वार्ड बनाया गया था।
कार्यदायी संस्था हिंदुस्तान स्टील वर्क्स कंस्ट्रक्शन, नई दिल्ली ने दो साल पहले इसका निर्माण पूरा कर दिया था लेकिन मरीजों को ऊपर ले जाने के लिए कोई रास्ता (रैंप या सुगम मार्ग) ही नहीं बनाया गया। रास्ता न होने के कारण यह नया वार्ड पिछले दो साल से ताले में बंद है, जबकि अस्पताल में बेड की भारी कमी बनी हुई है।
दो महीने पहले लोनिवि के थर्ड पार्टी सत्यापन और ओके रिपोर्ट के बाद स्वास्थ्य विभाग ने इसे हैंडओवर लिया था लेकिन मानसून शुरू होते ही तीसरी मंजिल की छत फिर से टपकने लगी है जिससे उसके ठीक नीचे स्थित पीडियाट्रिक (बच्चा) वार्ड में पानी भर रहा है। तीमारदार बीमार बच्चों को बचाने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। यही नहीं नए वार्ड के संचालन के लिए स्टाफ और उपकरणों को लेकर भी कोई स्पष्ट शासनादेश नहीं है।
कोट
- फर्म ने मरीजों को ऊपर ले जाने का रास्ता ही नहीं बनाया है और छत से पानी का रिसाव जारी है। पिछले पांच महीनों से संबंधित फर्म को पत्र भेजे जा रहे हैं। कार्यदायी संस्था के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए शासन को लिखित रूप में अवगत करा दिया है। - डॉ. गिरिजा शंकर जोशी, प्रभारी सीएमएस, जिला अस्पताल
- अस्पताल में नवनिर्मित वार्ड का संचालन अब तक क्यों नहीं किया गया, इसकी पूरी जानकारी संबंधित अधिकारियों से जुटाई जा रही है। जल्द से जल्द इसे जनता के लिए संचालित कराने का प्रयास किया जाएगा। - पार्वती दास, विधायक, बागेश्वर