कमस्यारघाटी के रातसेरा की कुलूर नदी में बृहस्पतिवार को खनन कार्य शुरू होने की सुगबुगाहट पर तमाम गांवों की महिलाओं ने हाथों में डंडे उठा लिए। महिलाओं ने वहां पहुंची जेसीबी को आगे बढ़ने से रोक दिया। नदी में खनन कार्य करने पर ग्रामीणों ने उग्र आंदोलन की चेेतावनी दी है। महिलाओं ने कहा कि यदि क्षेत्र में स्टोन क्रेशर लगाने के प्रयास किए गए तो वह आत्मदाह करने से भी पीछे नहीं हटेंगी।
कुलूर नदी में बृहस्पतिवार की सुबह जैसे ही एक जेसीबी पहुंची रावतसेरा, धारी, मध्या, भयूं, खैलकोट जग्यूड़ा, कफाली, भंडारीसेरा के ग्रामीणों ने जेसीबी को आगे बढ़ने ही नहीं दिया। ग्रामीणों ने कहा कि नदी में खनन कार्य करने के विरोध में क्षेत्र की जनता प्रशासन को पहले ही लिखित में सूचना दे चुकी है।
इसके बावजूद यहां पर स्टोन क्रेशर लगाने की तैयारियां की जा रही हैं। दो किमी दूर से नदी मार्ग को नुकसान पहुंचाकर जेसीबी उडेरिया गांव तक पहुंचाई गई है। जिस स्थान पर स्टोन क्रेशर प्रस्तावित है वहां पर राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय है। क्रेशर लगने से नदी में खनन बढ़ेगा, पर्यावरण को भारी क्षति पहुंचेगी।
ग्रामीणों ने कहा कि यदि खनन किया गया तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। कुछ महिलाओं ने जबरन खनन कार्य करने पर आत्मदाह करने की चेतावनी दी। खनन पर चुप्पी साधने पर क्षेत्रीय विधायक के खिलाफ भी जोरदार नारेबाजी की। माधवी रावत के नेतृत्व में प्रदर्शन करने वालों में ग्राम प्रधान रावतसेरा लीला रावत, प्रधान धारीमध्या सुरेश राम, गिरधारी रावत, पूर्व प्रधान सुरेश रावत, सुरेंद्र रावत, जगदीश रावत, हंसी रावत, गौरव रावत, अमित रावत, उमा रावत, तुलसी देवी, नीमा रावत, लीला देवी, सुषमा, ममता धपोला सहित भारी संख्या में ग्रामीण शामिल थे।
रावतसेरा क्षेत्र में जेसीबी पहुंचने पर ग्रामीणों के प्रदर्शन की सूचना मिलते ही क्षेत्रीय पटवारी को मौके पर पहुंचने के निर्देश दिए थे। पटवारी ने जेसीबी को मौके से हटवा दिया।
- मैनपाल सिंह, तहसीलदार कांडा।