बागेश्वर। कमेड़ीदेवी-रंगथरा-मजगांव-चौनाला मोटर मार्ग के लिए काटे जा रहे पेड़ों के बचाने के लिए जाखनी गांव की महिलाओं का चिपको की तर्ज पर आंदोलन जारी है। महिलाओं के आंदोलन में गांव के पुरुष भी शामिल हो गए हैं। ग्रामीणों ने एकजुट होकर पुरखों के बसाए जंगल को बचाने का एलान किया। उन्होंने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए प्राणों को भी न्योछावर करने की बात कही है।
सोमवार को चिपको आंदोलन की तर्ज पर जाखनी गांव की महिलाओं ने बांज, बुरांश और उतीस के पेड़ों से लिपटकर आंदोलन शुरू किया था। बुधवार को गांव के पुरुषों ने भी आंदोलन में भागीदारी की। ग्रामीणों ने कहा कि मोटर मार्ग निर्माण में सदियों से संरक्षित किए गए पेड़ों को नहीं कटने नहीं दिया जाएगा। जंगल ग्रामीणों के जीवन का आधार है। बांज के घने जंगल से ही गांव में पानी की समुचित व्यवस्था है। जानवरों के लिए चारा एकत्र होता है।
गांव की सरपंच कमला देवी ने कहा कि शादी के बाद से वह जंगल को संरक्षित करने का काम करती आईं हैं। वर्तमान में उनके पास वनों की जिम्मेदारी है। कहा कि विकास के नाम पर वनों का कटान रोका जाना चाहिए। पूर्व बीडीसी सदस्य जोगा सिंह मेहता, सामाजिक कार्यकर्ता हेमवंत सिंह मेहता, ग्राम प्रधान ईश्वर मेहता ने कहा कि पहले ही पहाड़ों से विकास के नाम पर जंगलों को नष्ट किया जा चुका है। जंगल नहीं होने से बंदर, जंगली सुअर, तेंदुए आदि हिंसक जानवरों ने आबादी क्षेत्रों में धमक बढ़ा दी है। पर्यावरणीय असंतुलन के कारण पहाड़ों में भी तापमान बढ़ता जा रहा है। पानी के स्रोत सूख रहे हैं। ऐसे में विकास के नाम पर बसे-बसाए जंगल की बलि चढ़ने नहीं दी जाएगी। ग्रामीणों ने सड़क का सर्वे बदले जाने तक आंदोलन पर डटे रहने की चेतावनी दी। इस मौके पर चंद्रा देवी, तुलसी देेव, हंसी देवी, कलावती देवी, शांति देवी, इंद्रा देवी, खिमुली देवी, हरुली देवी, दर्शन मेहता, कमल मेहता, कल्याण सिंह मेहता, गोप राम, रूप सिंह मेहता सहित पांच दर्जन से अधिक ग्रामीण मौजूद रहे।
फिर पेड़ों से लिपटीं महिलाएं
बागेश्वर। बुधवार को धरना-प्रदर्शन के बाद महिलाओं ने एक बार फिर पेड़ों से लिपटकर जंगल काटने का विरोध जताया। महिलाओं ने कहा कि इन पेड़ों को उन्होंने अपने बच्चों की तरह पाला है। सड़क कटेगी तो बड़े पेड़ों के साथ कई छोटे-छोटे पौधे भी काटे जाएंगे। सड़क कटान के मलबे से गांव के पेयजल स्रोत भी नष्ट हो जाएंगे। कहा कि आधा पहाड़ को विकास के नाम पर नष्ट कर दिया गया है। उनके पूर्वजों ने इस जंगल को सदियों से बचाकर रखा है। इसे सुरक्षित और संरक्षित रखना ग्रामीणों का कर्तव्य है जिसको पूरा करने के लिए ग्रामीण हर तरह की लड़ाई को तैयार हैं।
अधिकारियों की उपेक्षा से बढ़ता जा रहा रोष
बागेश्वर। जाखनी के ग्रामीणों में अधिकारियों की उपेक्षा से भी रोष बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि वे जंगल बचाने के लिए आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन या शासन उपेक्षा कर रहा है। कहा कि अब भी सड़क कटान का काम चल रहा है। अधिकारी आंदोलनकारियों की सुध लेने की जहमत तक की नहीं उठा रहे हैं। हालांकि वन विभाग की ओर से काम रोके जाने की बात कही जा रही है, लेकिन कोई ठोस आश्वासन ग्रामीणों को नहीं दिया गया है। (संवाद)
वन विभाग ने लोनिवि को काम रोकने के लिए कहा
बागेश्वर। जाखनी के ग्रामीणों का चिपको आंदोलन असर दिखाने लगा है। पेड़ों को काटने का विरोध कर रहे ग्रामीणों के तेवर देखते हुए वन विभाग ने लोक निर्माण विभाग को मजगांव से आगे का काम रोकने के लिए कहा है। वहीं लोनिवि के अधिकारियों का कहना है कि जाखनी के लिए अभी सड़क का निर्माण शुरू नहीं हुआ है। फिलहाल मजगांव तक सड़क काटी जा रही है। जिसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। लोनिवि के अधिकारी स्थलीय निरीक्षण के बाद आगे के निर्माण की कार्ययोजना तैयार करने की बात कह रहे हैं।
कमेड़ीदेवी-रंगथरा-मजगांव-चौनाला मोटर मार्ग का निर्माण कार्य इन दिनों चल रहा है। पूर्व से ही सड़क निर्माण को लेकर सेरी और जाखनी के ग्रामीण विरोध करते आ रहे हैं। मामला हाईकोर्ट तक भी पहुंचा। अदालत के आदेश के बाद लोनिवि ने मोटर मार्ग का निर्माण शुरू करवा दिया, लेकिन जाखनी के ग्रामीणों ने इसका विरोध किया। ग्रामीणों ने सड़क को जंगल से काटने की बजाय खारीगाड़ तोक से बनाने के लिए कहा है। लोगों ने वन विभाग के छपान किए पेड़ों की तुलना में अधिक पेड़ कटने की आशंका के चलते सड़क के विरोध में आंदोलन शुरू कर दिया।
बागेश्वर के जाखनी गांव में बुधवार को भी महिलाओं ने चिपको की तर्ज पर पेड़ों से लिपटकर किया आंदोलन।- फोटो : BAGESHWAR