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कमस्यार घाटी में इलाज के लिए महिला डॉक्टर ही नहीं 

Sun, 10 Dec 2017 10:07 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो बागेश्वर।
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राजकीय ऐलोपैथिक चिकित्सालय देवतोली का दृश्य।  - फोटो : अमर उजाला
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 सरकारी योजनाओं और मंत्रियों की घोषणाओं के दावे पहाड़ पर चढ़ते-चढ़ते शायद हांफने लगते हैं। यही हाल महिला सशक्तीकरण का भी हो रहा है। इसकी बानगी कमस्यार घाटी के तमाम गांव हैं। यहां महिलाओं की करीब आठ हजार की आबादी के लिए एक भी महिला डॉक्टर नियुक्त नहीं है। 40 साल पहले देवतोली में बड़ी जद्दोजहद से खुले राजकीय एलोपैथिक चिकित्सालय में आज तक महिला डॉक्टर का पद ही सृजित नहीं हो सका है। महिलाओं को आंतरिक रोगों के इलाज या प्रसव संबंधी दिक्कत होने पर उन्हें यहां से 45 किमी दूर कांडा या फिर 72 किमी दूर जिला मुख्यालय की दौड़ लगाने को मजबूर होना पड़ता है। क्षेत्र के लोगों ने शासन और स्वास्थ्य विभाग से महिला डॉक्टर का पद शीघ्र सृजित करने की मांग की है। 
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बता दें कि कमस्यार घाटी के अंतर्गत आने वाले खातीगांव, नरगोली, तुषरेड़ा, कपूरी, चंतोला, भंडारीगांव, बगराटी, रावतसेरा, पैठाण, कोटभंडार, पस्ट्यारी, घोड़ागाड़, भंडारीसेरा, भैंसूड़ी, ट्यांकोट, खाड़ीभैंसखाल, अठपैसिया, अखरांणी, घिराड़ी, देवतोली, देवलेत, औलानी, ठांगा, धारी, डोबरगाड़ा, सिंमायल समेत कई अन्य गांवों में महिलाओं की संख्या आठ हजार से अधिक है।

दिवंगत स्वतंत्रता सेनानी त्रिलोक सिंह डसीला के प्रयासों से देवतोली में वर्ष 1976-77 में राजकीय एलोपैथिक चिकित्सालय की स्थापना हुई। अस्पताल में पुरुष डॉक्टर की अस्थायी तौर पर तैनाती है, जबकि फार्मेसिस्ट पूर्णकालिक है, लेकिन आज तक अस्पताल में महिला डॉक्टर का पद ही सृजित नहीं हो सका है। महिलाओं को आंतरिक रोगों के इलाज के लिए करीब 45 किमी दूर कांडा या फिर 72 किमी दूर जिला मुख्यालय की दौड़ लगानी पड़ती है।
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इसमें उनका काफी पैसा और समय दोनों बर्बाद होता है। महिला डॉक्टर नहीं होने से प्रसव पीड़िताओं को और भी दिक्कतें झेलनी पड़ती है। पूर्व सैनिक संगठन के अध्यक्ष कृपाल सिंह रावत, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी कांडा कमस्यार के सूबेदार बहादुर सिंह डसीला, कमस्यार संघर्ष समिति के अध्यक्ष सतीश उप्रेती और बीडीसी सदस्य कुंदन बोरा आदि ने शासन और स्वास्थ्य विभाग से अस्पताल में महिला डॉक्टर की शीघ्र तैनाती करने की मांग की है। कपकोट के विधायक बलवंत भौर्याल ने कहा कि अस्पताल में महिला चिकित्सक की तैनाती के लिए मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री से बात की जाएगी। 
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