बागेश्वर में नुुक्कड़ नाटक पेश करते लोग।
- फोटो : अमर उजाला
उप मुुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. वीके सक्सेना ने कहा कि केवल कानून बनाने से ही कन्या भ्रूण हत्या नहीं रुकेगी। इस पर अंकुश लगाने के लिए सभी को आगे आना होगा। डा. सक्सेना स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान डायट के सभागार में हुई गोष्ठी को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
कन्याभ्रूण हत्या महापाप विषय पर हुई इस गोष्ठी में डॉ. सक्सेना ने कहा कि कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए कानून बने 23 साल से अधिक का समय हो गया है। बावजूद देश में लिंगानुपात एक हजार पुरुषों पर 930 महिलाएं होने, शून्य से छह आयु वर्ग में यह अनुुपात और भी कम होने से एक विषम परिस्थिति सामने है। इसके मूल में दहेज प्रथा, पुत्र कामना, महिला बालिका सुरक्षा आदि कारण हैं। जिनका समाधान सामाजिक जागरूकता से ही किया जा सकता है।
डायट के प्राचार्य डॉ. केवलानंद कांडपाल ने कन्या भ्रूण हत्या के विविध कानूनी, सामाजिक और सांस्कृतिक घटकों की जानकारी दी। संचालन करते हुए डॉ. बीडी पांडे ने कहा कि प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम 1984 की जानकारी देते हुए कहा कि प्रसव से पूर्व लिंग की जांच कराना जघन्य अपराध है। एनसीसी अधिकारी दीप चंद्र जोशी ने कहा कि केरल और पांडिचेरी को छोड़कर देश के सभी राज्यों में बालिकाओं की संख्या बालकों से कम है। इस मौके पर पीसीपीएनटीडीटी के जिला समन्वयक सुरेश कुकरेती, केपी चंदोला, डॉ. राजीव जोशी, रवि कुमार जोशी डॉ. केएस रावत, बीएस कोरंगा और हरिओम मेहता आदि थे।
इधर स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग देहरादून की ओर से यहां पहुंची टीम ने नगर के विभिन्न क्षेत्रों में नुक्कड़ नाटक पेश लोगों को कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए जागरूक किया। उन्होंने लोगों को लिंगानुपात और बच्चों को लगने वाले विभिन्न टीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। टीम में शामिल देवेंद्र सिंह ने बताया आज बालिकाएं बालकों से किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं।