आजादी के 77 साल बाद वाछम गांव का जातोली तोक बिजली से रोशन हो गया है। बिजली पहुंचने पर गांव में उत्सव जैसा माहौल रहा। लोगों ने पहले खंभे को टीका लगाया। इसके बाद बल्ब जलाया। अब तक गांव के लोग ढिबरी या सोलर लैंप के सहारे जीवन यापन कर रहे थे।
आजादी के 77 साल बाद वाछम गांव का जातोली तोक बिजली से रोशन हो गया है। बिजली पहुंचने पर गांव में उत्सव जैसा माहौल रहा। लोगों ने पहले खंभे को टीका लगाया। इसके बाद बल्ब जलाया। अब तक गांव के लोग ढिबरी या सोलर लैंप के सहारे जीवन यापन कर रहे थे। जातोली तोक सुंदरढूंगा ग्लेशियर मार्ग का अंतिम गांव है। यहां 36 परिवार रहते हैं। दो साल पहले वाछम गांव को पहली बार बिजली से जोड़ा गया तो तोक के लोगों में भी जल्द लाभ मिलने की उम्मीद जगी।
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क्षेत्र की विषम भौगोलिक परिस्थितियां और मौसम के कारण उनका इंतजार लंबा खिंच गया। रविवार को तोक में पहली बार बिजली सप्लाई चालू की गई। ग्रामीणों ने बिजली का अनोखे अंदाज में स्वागत किया। उन्होंने सबसे पहले खंभे को रोली-अक्षत से टीका लगाकर विधिवत पूजा की। इसके बाद तालियां बजाकर बल्ब जलाया।
ग्रामीणों ने जताया आभार
निवर्तमान ग्राम प्रधान मालती देवी ने कहा कि उनके कार्यकाल में पूरे गांव का बिजली से जुड़ना उनके लिए बड़ी उपलब्धि है। सामाजिक कार्यकर्ता चंदन दानू ने कहा कि तोक के समस्त ग्रामीण बिजली आने से बहुत खुश हैं। ग्रामीणों ने विधायक सुरेश गढि़या और यूपीसीएल का आभार जताया है।
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62.18 लाख रुपये से गांव तक डाली गई छह किमी लंबी लाइन
वाछम से जातोली के लिए 62.18 लाख रुपये की लागत से 4.5 किमी हाईटेंशन और 1.5 किमी लंबी लो टेंशन लाइन डाली गई है। 25 केवी का ट्रांसफार्मर गांव में लगाया गया है। गांव में बिजली का ट्रायल सफल हो गया है। ग्रामीण इन दिनों बिजली फिटिंग आदि कार्य करवा रहे हैं। जल्द ही सभी घरों को कनेक्शन दिए जाएंगे। एसएस भंडारी, एसडीओ, यूपीसीएल