बागेश्वर। इस साल मौसम के बदले मिजाज का असर पहाड़ों की सैर पर आने वाले पर्यटकों और ट्रैकरों की आवाजाही पर पड़ा है। बेमौसमी बारिश के चलते मैदानी क्षेत्रों में अपेक्षाकृत तापमान कम रहने से जिले में बेहद कम सैलानी पहुंचे हैं। बर्फबारी और बारिश होने से ग्लेशियरों में ट्रैकिंग करने वालों की संख्या भी घटी है। जिले के पिंडारी, कफनी और सुंदरढूंगा ग्लेशियर में अप्रैल-मई के बीच केवल 340 ट्रैकर ही पहुंच सके हैं जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 810 रहा था।
ग्लेशियरों की यात्रा गर्मी के सीजन में 15 अप्रैल से 15 जून तक चलती है। फिर मानसून के चलते ग्लेशियरों में जाने पर रोक लगा दी जाती है। अन्य वर्षों में गर्मी के सीजन में ग्लेशियरों में ट्रैकरों का आना-जाना लगा रहता था लेकिन इस साल हालात पूरी तरह से बदले हैं। अप्रैल और मई में हुई बारिश का असर ग्लेशियरों की यात्रा पर पड़ा।
ट्रैकरों की आवाजाही घटने से खाती, वाछम, जांतोली, जैंकुनी आदि गांवों के गाइड और पोर्टरों का कारोबार प्रभावित हुआ है जिसे देखते हुए इस साल ट्रैकिंग सीजन को आगे बढ़ाने की मांग भी क्षेत्रवासी उठा चुके हैं।
पिछले साल की तुलना में 16077 सैलानी कम आए
बागेश्वर। जिले में मार्च के बाद गर्मी के पर्यटन सीजन की शुरुआत हो जाती है। अप्रैल, मई और जून में सीजन चरम पर रहता है। इस दौरान देश और विदेश के सैलानी कौसानी, बैजनाथ, बागेश्वर, कपकोट के दर्शनीय स्थलों की सैर पर आते हैं। पिछले साल अप्रैल में 7827 और मई में 15927 देशी-विदेशी पर्यटक आए थे लेकिन इस साल अप्रैल में 4962 और मई में अब तक 2715 देशी-विदेशी सैलानी ही पहुंच सके हैं जो पिछले साल की तुलना में 16077 कम हैं। संवाद
मौसम का मिजाज बदलने का असर पर्यटन सीजन पर पड़ा है। हालांकि पिछले दिनों मौसम साफ रहने के बाद पर्यटक और ट्रैकरों की आवाजाही तेज हुई है। ट्रैकरों का एक दल इन दिनों पिंडारी गया है। सैलानियों की संख्या भी बढ़ रही है। उम्मीद है आने वाले दिन पर्यटन के लिहाज से अच्छे रहेंगे। -कीर्ति चंद्र आर्या, जिला पर्यटन विकास अधिकारी, बागेश्वर।