बागेश्वर। अगर हम ये कहें कि सरयू और गोमती के तट पर बसे बागेश्वर के लोग पीने के पानी के लिए तरस रहे हैं तो गलत नहीं होगा। जिला मुख्यालय के लोगों को जरूरत से आधा ही पानी मिल पा रहा है। कई इलाके ऐसे हैं, जहां लोगों को तीसरे दिन भी पानी नसीब नहीं होता है।
करीब 50 हजार आबादी वाले बागेश्वर नगर को रोज 7.28 एमएलडी पानी की जरूरत है लेकिन छह योजनाओं से केवल 3.60 एमएलडी पानी ही मिल रहा है। जिला मुख्यालय में नगरीय आईबेल पेयजल योजना, मंडलसेरा पेयजल योजना, कठायतबाड़ा ग्राम समूह पेयजल योजना, बिलौना पेयजल योजना, थापली पेयजल योजना, अमसरकोट नगरीय पेयजल योजना से पानी मिलता है।
इन योजनाओं को बागेश्वर नगरीय पेयजल योजना के नाम से जाना जाता है। इन योजनाओं से नगर पालिका के 11 वार्डों मेें आपूर्ति होती है। आवश्यकता से कम पानी मिलने के कारण मंडलसेरा, ज्वाला देवी, बिलौना और तहसील रोड के लोग वर्षों से पानी की किल्लत झेल रहे हैं। तहसील रोड में किन्हीं इलाकों में तीसरे दिन भी पानी की आपूर्ति नहीं होती है।
अधिकतर योजनाएं जिला बनने से पहले की
बागेश्वर। नगरीय क्षेत्र में अधिकतर योजनाएं जिला बनने से पहले की हैं। बागेश्वर जिला 1997 में बना था, जिसके बाद केवल नगरीय आईबेल पेयजल योजना वर्ष 2016 में बनी है, जबकि कठायतबाड़ा पंपिंग योजना का पुर्नगठन 2004 में किया गया था। बिलौना योजना वर्ष 1979, थापली योजना वर्ष 1985, मंडलसेरा वर्ष 1987 और अमसरकोट नगरीय योजना वर्ष 1992 में बनी थी। इन योजनाओं को 25 वर्ष की जरूरत को देखते हुए बनाया गया था।
मंडलसेरा पंपिंग योजना बनने से मिलेगी राहत
बागेश्वर। मंडलसेरा वार्ड में पानी की किल्लत दूूर करने के लिए मंडलसेरा पंपिंग योजना का निर्माण चल रहा है। इस योजना के बनने के बाद क्षेत्रवासियों को पेयजल किल्लत से राहत मिलेगी। जखेड़ा पेयजल योजना के पुनर्गठन के लिए शासन को डीपीआर भेजी गई है।
कम पानी मिलने से दिक्कत आती है। गर्मियों में जलस्रोतों में पानी कम हो जाता है। जलापूर्ति के लिए रोस्टर बनाया जाएगा।- एमके टम्टा, ईई जल संस्थान बागेश्वर