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बागेश्वर के शिवालयों में नंदा कुंड के जल से जलाभिषेक किया

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बागेश्वर में नंदा कुंड से जल लेकर शिवालयों की ओर जाते श्रद्धालु। संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : BAGESHWAR
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कपकोट/बागेश्वर। भद्रतुंगा विकास एवं सरयू संरक्षण समिति ने सहस्रधारा-भद्रतुंगा-बागनाथ पदयात्रा के दौरान जिले के तमाम शिवालयों में जलाभिषेक किया। इस बार कोरोना के चलते समिति बागनाथ मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक नहीं कर पाई। बागनाथ मंदिर के कपाट सोमवार को सावन के तीसरे सोमवार को भी नहीं खुले।
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विकास समिति वर्ष 2017 से सहस्रधारा-भद्रतुंगा-बागनाथ पदयात्रा का आयोजन कर रही है। इस बार भी समिति ने मंदिर के प्रबंधक और पुजारियों को यात्रा की जानकारी दी। इसमें उन्होंने कोरोना के चलते मंदिर के कपाट बंद होने का हवाला दिया। इसके बाद समिति ने अपने कार्यक्रम में आंशिक बदलाव किया। समिति के प्रभारी अध्यक्ष भगवत सिंह कोरंगा ने बताया कि महामारी को देखते हुए मात्र छह सदस्य यात्रा में शामिल हुए। संत देवानंद दास के नेतृत्व में दो सदस्यों का दल शनिवार को हिमालय के नंदा कुंड से पवित्र जल और ब्रह्मकमल लेकर रविवार शाम भद्रतुंगा पहुंचा। जहां अन्य सदस्यों के साथ मिलकर भगवान शिव का जलाभिषेक किया गया। इसके बाद दल के सदस्य जय श्री राम का उद्घोष करते हुए तप्तकुंड महादेव पहुंचे। तप्तकुंड में जलाभिषेक के बाद दल कपकोट के हरसीला स्थित शिवालय होकर बागेश्वर पहुंचा। यहां प्रकटेश्वर और नीलेश्वर महादेव मंदिर में जल और पुष्प अर्पित कर यात्रा को विराम दिया गया। समिति के सलाहकर दयाल कुमल्टा ने बताया कि अगले साल फिर से यात्रा को भव्य रूप दिया जाएगा। कहा कि पदयात्रा शुरू होने के बाद सरमूल के प्रति लोगों का रुझान बढ़ा है। यात्रा में रोहित पंत, उमेश सिंह, नवनीत सिंह, गोकुलानंद पाठक, दीपेश रौतेला आदि थे।
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