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शामा एपीएचसी की छत से टपक रहा अव्यवस्थाओं का ‘पानी’

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बागेश्वर। अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र शामा (एपीएचसी) को उपचार की आवश्यकता है। 30 अक्तूबर 2004 को शामा अस्पताल को लोगों को समर्पित किया था। तब से अब तक अस्पताल की स्वास्थ्य सुविधाओं में ज्यादा परिवर्तन नहीं आया है। पांच वर्षाें से अस्पताल की छत से पानी टपक रहा है, जिसे अब तक ठीक नहीं किया जा सका है। इससे अस्पताल स्टाफ के साथ-साथ मरीजों और तीमारदारों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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स्थानीय लोगों ने बताया कि उन्हें अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र शामा का जरूरत के मुताबिक लाभ नहीं मिल पा रहा है। 18 ग्रामसभाओं की सैंकड़ों की आबादी इलाज के लिए इस पर निर्भर है, लेकिन लोगों को यहां से उचित उपचार न मिलना परेशानी का कारण बना हुआ है। लैब की सुविधा नहीं होने से रोगों की जांच नहीं हो पाती है। लोग इलाज के लिए बागेश्वर, अल्मोड़ा, हल्द्वानी जाने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि अस्पताल में महिला चिकित्सक तैनात है लेकिन अक्सर स्वास्थ्य सुविधा का लाभ नहीं मिल पाता। सफाई कर्मी के अभाव में अस्पताल की सफाई व्यवस्था चरमरा गई है। अस्पताल के चारों ओर गंदगी फैली रहती है। अस्पताल में मात्र दो बेड की सुविधा है।
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शामा से बागेश्वर की दूरी करीब 55 किलोमीटर है। ऐसे में गंभीर मरीजों को बागेश्वर जिला अस्पताल तक लाने में जान का खतरा रहता है। कई बार बागेश्वर से भी मरीजों को रेफर करना पड़ता है। स्वास्थ्य सुविधाओं की ये बदहाली लोगों पर भारी पड़ते जा रही है।
अस्पताल में जरूरत के मुताबिक सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं। अस्पताल की छत से पानी टपकने की जानकारी नहीं है। अस्पताल में जो भी कमियां हैं, उन्हें दूर करने का प्रयास किया जाएगा। - डॉ. वीके सक्सेना उप मुख्य चिकित्साधिकारी बागेश्वर
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