बागेश्वर। दो दिन तक हुई बारिश से स्वास्थ्य विभाग की मानसून पूर्व तैयारियों की पोल खुल गई है। जिला अस्पताल की छत से पानी रिस रहा है। बच्चा वार्ड में पानी का रिसाव होने से वहां भर्ती मरीजों को दूसरी जगह शिफ्ट करना पड़ा है। सीएमएस से लेकर सीएमओ तक इसकी जिम्मेदारी लेने से पल्ला झाड़ने में लगे हैं।
मानसून काल शुरू होने के बाद डीएम आशीष भटगांई ने जिले के सभी विभागों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग अब तक गहरी नींद में सोया है। जिला अस्पताल के प्रभारी सीएमएस अवकाश पर हैं। डॉ. डीपी शुक्ला को सीएमएस का प्रभार दिया गया है। अस्पताल में पानी का रिसाव बरसात के मौसम में सबसे बड़ी समस्या है। इसे देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने 2024 में अस्पताल की छत सहित अन्य मरम्मत कार्य कराए थे। मरम्मत कार्य पूरा हुए महज चार से पांच महीने बीते हैं।
पहली बारिश में ही कार्यों की पोल खुलनी शुरू हो गई है। पानी के रिसाव से मरीजों, तीमारदारों और अस्पताल के कर्मचारियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बीते दिनों डीएम भटगांई ने जिला अस्पताल के निरीक्षण के दौरान अस्पताल प्रशासन से संबंधित कार्यदायी संस्था के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए थे, लेकिन अब तक न तो कोई कार्रवाई हुई न ही समस्या का समाधान हुआ।
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बढ़ने की बजाय घट रहे संसाधन
जिले के सबसे बड़े अस्पताल में संसाधन बढ़ने की बजाय घट रहे हैं। बच्चा वार्ड में पानी का रिसाव होने से वहां भर्ती मरीजों को जरनल और अन्य वार्डों में शिफ्ट किया गया है। जिससे अब अन्य वार्डों में मरीजों की संख्या बढ़ गई है। जल्द समाधान नहीं हुआ तो जरनल वार्ड भी पानी के रिसाव के चलते अन्यत्र शिफ्ट करना पड़ सकता है।
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सीएमओ और प्रभारी सीएमएस बोले, हमारे कार्यकाल में नहीं हुआ कार्य
जिला अस्पताल में हुए मरम्मत कार्य के बाद हो रहे रिसाव के बारे में जब प्रभारी सीएमएस डॉ. डीपी शुक्ला से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि जिला अस्पताल में मरम्मत का कार्य उनके कार्यकाल में नहीं हुआ। कार्य किसने किया, नोटिस किसे भेजना है, इस संबंध में भी उन्हें कोई जानकारी नहीं है। सीएमओ डॉ. कुमार आदित्य तिवारी ने बताया कि जब जिला अस्पताल में मरम्मत कार्य हुआ तब वह जिले में सीएमओ नहीं थे। कार्य तत्कालीन अस्पताल प्रशासन ने करवाया है। सीएमएस के अधीन कार्य हुआ था। इसका जवाब वर्तमान सीएमएस बेहतर दे सकते हैं।