बागेश्वर। चनबौड़ी-सिमतोली और साता-प्यारा गांव के ग्रामीणों के लिए विकास का दावा आज भी कागजी ही साबित हो रहा है। सड़क के अभाव में ग्रामीण मीलों पैदल चलने को मजबूर हैं। मंगलवार की देर शाम पूजा देवी (29) के पेट में तेज दर्द होने पर ग्रामीणों को उन्हें डोली में रखकर चार किमी पथरीले रास्तों से पैदल मुख्य मार्ग तक लाना पड़ा।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की मांग के लिए उन्होंने 2018 में बड़ा आंदोलन किया था। तब तत्कालीन कैबिनेट मंत्री और क्षेत्रीय विधायक चंदन राम दास ने सड़क निर्माण का भरोसा दिया था लेकिन आठ साल बाद भी स्थिति जस की तस है। सड़क न होने से सबसे ज्यादा मुसीबत गर्भवतियों और बुजुर्गों को उठानी पड़ती है। युवाओं के पलायन के कारण अब डोली उठाने के लिए भी कंधे कम पड़ने लगे हैं। लोनिवि और पीएमजीएसवाई की ओर से सर्वे किया जा चुका है और फॉरेस्ट क्लीयरेंस भी मिल गई है। इसके बावजूद निर्माण कार्य अधर में लटका है। ग्राम प्रधान दीपा देवी और पूर्व प्रधान आनंद सिंह मेहता सहित ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द काम शुरू नहीं हुआ, तो होली के बाद रणनीति बनाकर आमरण अनशन किया जाएगा।
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सड़क की डीपीआर बनाने के लिए कई बार टीम गांव गई लेकिन कई जगह ग्रामीणों के विरोध के चलते डीपीआर का गठन नहीं हो पा रहा है। दोबारा टीम को सर्वे तैयार करने के लिए भेजा गया है। ग्रामीणों का सहयोग मिला तो जल्द ही सड़क की डीपीआर तैयार कर शासन को भेजी जाएगी। -नरेश पाठक, एई पीएमजीएसवाई बागेश्वर