बिजली की लाइनें जुड़ जाएंगी, पानी के नल भी नए लग जाएंगे लेकिन जान ही सुरक्षित नहीं रहेगी तो इन सुविधाओं का क्या करेंगे साहब। यह दर्द है राहत कैंप में शरण लेने वाले पौंसारी गांव के आपदा प्रभावित लोगों का। गम और गुस्से के मिश्रित भावों को दिल में समेटे इन ग्रामीणों की करुण पुकार है कि सुरक्षित जगह पर विस्थापन किया जाए।बैसानी के राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में सरकारी इंतजाम के तहत राहत कैंप बनाया गया है। माैत के पंजे से बचकर यहां आए लोग खाैफजदा और बेचैन हैं। ये लोग आज भी उस काली रात को भूल नहीं पा रहे जब सैलाब और मलबे ने उनके अपनों और सपनों को निगल लिया।
बोले ग्रामीण-
आपदा की रात के बाद कई परिवार राहत कैंप में रह रहे हैं जो गांव में बचे हैं उनकी रात जागकर कट रही है। बारिश ने मेरी सारी फसल बर्बाद कर दी है। जानवर भी कीचड़ में फंस गए थे। किसी तरह उनकी जान बची। अब गांव में रहना मुश्किल हो गया है। - प्रताप राम, ग्रामीण
बारिश में घर क्षतिग्रस्त हो गया है। गांव के पीछे की पहाड़ियों से मलबा बह रहा है। बच्चों को साथ लेकर रात को राहत कैंप में आ रहे हैं। सुबह फिर गांव जा रहे हैं। कब तक ऐसे भागते रहेंगे। सुरक्षित स्थान पर गांव वालों का पुनर्वास कराया जाए। - तारा राम कोहली, ग्रामीण
सरकार बिजली, पानी, सड़क सुविधाओं को दुरुस्त कर रही है लेकिन अब तो लोगों की जिंदगी का सवाल है। ग्रामीण गांव में सुरक्षित ही नहीं हैं तो इन सुविधाओं का क्या लाभ। सरकार से मांग है कि पूरे गांव को अन्यत्र बसाया जाए। - हरीश राम, ग्राम प्रधान प्रतिनिधि
हमारा गांव कब तक आपदा की मार झेलता रहेगा। आपदा के बाद से ग्रामीण डरे हुए हैं। कई लोगों की खेतीबाड़ी, पशुधन बर्बाद हो चुके हैं। अब तो विस्थापन ही गांव के लोगाें को सुरक्षित रखेगा। - मधुली देवी, ग्रामीण
तीन छोटे-छोटे बच्चे हैं। कमाई का कोई साधन नहीं है। खेती आपदा की भेंट चढ़ गई है। हर साल बारिश में फसल का नुकसान हो जाता है। इस साल परेशानी अधिक हो गई है। हमें जल्द से जल्द कहीं दूसरी जगह बसाया जाए। - कला देवी, ग्रामीण
आपदा प्रभावितों के लिए राउमावि बैसानी में राहत कैंप बनाया गया है। गांव में रहने वाले परिवारों को भी राशन उपलब्ध कराया गया है। ग्रामीणों के नुकसान का सर्वे कर उन्हें राहत राशि और अन्य मदद मुहैया कराई जा रही है। - सुरेश गढि़या, विधायक, कपकोट