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UK News: गम और गुस्सा...जिंदा नहीं रहेंगे तो बिजली-पानी का क्या करेंगे साहब, ग्रामीण बोले- कब तक डरकर रहें

Mon, 01 Sep 2025 01:41 PM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, बागेश्वर

सार

बागेश्वर जिले के कपकोट के पौंसारी गांव पर आसमान से ऐसी आफत बरसी है कि डर के बोझ तले हर सांस भारी है। ग्रामीणों का कहना है कि बिजली की लाइनें जुड़ जाएंगी, पानी के नल भी नए लग जाएंगे लेकिन जान ही सुरक्षित नहीं रहेगी तो इन सुविधाओं का क्या करेंगे साहब।
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पौंसारी गांव में आपदा के बाद रेस्क्यू सेंटर में प्रभावित परिवारों के सदस्य। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बिजली की लाइनें जुड़ जाएंगी, पानी के नल भी नए लग जाएंगे लेकिन जान ही सुरक्षित नहीं रहेगी तो इन सुविधाओं का क्या करेंगे साहब। यह दर्द है राहत कैंप में शरण लेने वाले पौंसारी गांव के आपदा प्रभावित लोगों का। गम और गुस्से के मिश्रित भावों को दिल में समेटे इन ग्रामीणों की करुण पुकार है कि सुरक्षित जगह पर विस्थापन किया जाए।बैसानी के राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में सरकारी इंतजाम के तहत राहत कैंप बनाया गया है। माैत के पंजे से बचकर यहां आए लोग खाैफजदा और बेचैन हैं। ये लोग आज भी उस काली रात को भूल नहीं पा रहे जब सैलाब और मलबे ने उनके अपनों और सपनों को निगल लिया।

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आंखों में आंसू और जेहन में डर है। साफ है कि आपदा का जख्म सिर्फ घरों और खेतों तक सीमित नहीं है बल्कि दिलो-दिमाग में गहरा उतर चुका है।पौंसारी गांव में करीब 45 परिवार रहते हैं। बीते दिनों आए सैलाब ने आठ मकानों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। सात-आठ मकानों में मलबा भर गया और कई घरों की दीवारों में गहरी दरारें पड़ गईं। बच्चों के पढ़ने का प्राथमिक स्कूल और मेहनत से सींची गई उपजाऊ जमीन तक बर्बादी की गवाही दे रहे हैं। 200 नाली उपजाऊ जमीन अब खंडहर में बदल चुकी है।

गोशालाओं के टूटने से कई पशु भी संकट में आ गए। राहत कैंप में ठहरे लोग हर रात बेचैनी में गुजार रहे हैं। कोई अपने खेतों के नुकसान पर रो रहा है, तो कोई बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव के पीछे की पहाड़ी लगातार खिसक रही है। हर बारिश के साथ उनके दिलों की धड़कनें तेज हो जाती हैं कि कब फिर मलबे का सैलाब टूट पड़ेगा।
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तीन साल पुराना जख्म भी ताजा
यह पहली बार नहीं है जब पौंसारी गांव आपदा की मार झेल रहा हो। वर्ष 2022 में भी मानसून ने यहां तबाही मचाई थी। उस वक्त भी घरों में मलबा घुस गया था और लोगों को डर के साये में जीना पड़ा था। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार हालात और ज्यादा भयावह हैं।

बोले ग्रामीण-

आपदा की रात के बाद कई परिवार राहत कैंप में रह रहे हैं जो गांव में बचे हैं उनकी रात जागकर कट रही है। बारिश ने मेरी सारी फसल बर्बाद कर दी है। जानवर भी कीचड़ में फंस गए थे। किसी तरह उनकी जान बची। अब गांव में रहना मुश्किल हो गया है। - प्रताप राम, ग्रामीण

बारिश में घर क्षतिग्रस्त हो गया है। गांव के पीछे की पहाड़ियों से मलबा बह रहा है। बच्चों को साथ लेकर रात को राहत कैंप में आ रहे हैं। सुबह फिर गांव जा रहे हैं। कब तक ऐसे भागते रहेंगे। सुरक्षित स्थान पर गांव वालों का पुनर्वास कराया जाए। - तारा राम कोहली, ग्रामीण

सरकार बिजली, पानी, सड़क सुविधाओं को दुरुस्त कर रही है लेकिन अब तो लोगों की जिंदगी का सवाल है। ग्रामीण गांव में सुरक्षित ही नहीं हैं तो इन सुविधाओं का क्या लाभ। सरकार से मांग है कि पूरे गांव को अन्यत्र बसाया जाए। - हरीश राम, ग्राम प्रधान प्रतिनिधि

हमारा गांव कब तक आपदा की मार झेलता रहेगा। आपदा के बाद से ग्रामीण डरे हुए हैं। कई लोगों की खेतीबाड़ी, पशुधन बर्बाद हो चुके हैं। अब तो विस्थापन ही गांव के लोगाें को सुरक्षित रखेगा। - मधुली देवी, ग्रामीण

तीन छोटे-छोटे बच्चे हैं। कमाई का कोई साधन नहीं है। खेती आपदा की भेंट चढ़ गई है। हर साल बारिश में फसल का नुकसान हो जाता है। इस साल परेशानी अधिक हो गई है। हमें जल्द से जल्द कहीं दूसरी जगह बसाया जाए। - कला देवी, ग्रामीण

आपदा प्रभावितों के लिए राउमावि बैसानी में राहत कैंप बनाया गया है। गांव में रहने वाले परिवारों को भी राशन उपलब्ध कराया गया है। ग्रामीणों के नुकसान का सर्वे कर उन्हें राहत राशि और अन्य मदद मुहैया कराई जा रही है। - सुरेश गढि़या, विधायक, कपकोट

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