कपकोट में पौंसारी गांव में उफनतमे गधेरे को इस तरह पार करते बुजुर्ग दंपत्ति।
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बागेश्वर जिले के पौंसारी के मानीगैर तोक में हुई मूसलाधार बारिश ने लोगों को पिछले साल 28 अगस्त की याद दिला दी। आसमान से बरसी आफत में तोक को जोड़ने वाला एकमात्र लकड़ी का पुल बह गया है। यहां रहने वाले पांच परिवारों पर भी खतरा मंडराने लगा है। बाहरी दुनिया से आवाजाही का संपर्क कटने से ग्रामीण तोक में कैद होकर रह गए हैं। जरूरी कार्य के लिए लोग जान जोखिम में डालकर गधेरा पार करने को मजबूर हैं।
बृहस्पतिवार की देर शाम से रात तक कनलगढ़ क्षेत्र में तेज बारिश हुई। गधेरे के समीप बसे मानीगैर तोक के लोगों की पूरी रात जागते हुए कटी। सुबह उठने पर लोगों ने गांव का रुख किया तो गधेरे में बना पुल कहीं नजर नहीं आया। लोगों को जलस्तर कम होने का इंतजार है। शुक्रवार को स्कूल जाने वाले छात्र-छात्राएं भी घरों में कैद होकर रह गए हैं। राजकीय इंटर कॉलेज कन्यालीकोट में 11वीं के छात्र विनोद कुमार, राजूहा बैसानी में कक्षा 10 के छात्र करन कुमार और आठवीं की एक छात्रा पुल टूटने से स्कूल नहीं जा सकीं। ग्रामीणों की दिनचर्या में शामिल खेतीबाड़ी, पशुपालन का काम भी बाधित रहा।
पुल बह जाने के कारण आज हम स्कूल नहीं जा पाए। नदी का बहाव इतना खतरनाक है कि बिना पुल के रास्ता पार करना संभव नहीं है। इस तरह मार्ग बंद होने से हमारी पढ़ाई का भारी नुकसान हो रहा है।
सुनीता, स्कूली छात्रा
बारिश शुरू होते ही हमारी सांसे अटक जाती हैं। रात भर बच्चे सहमे रहते हैं। अब पुल टूटने से न तो घर से बाहर निकलना मुमकिन है और न ही रोजमर्रा के जरूरी कार्यों के लिए बाजार या अन्य जगहों पर जा पा रहे हैं।
दीपा देवी, ग्रमीण महिला
पौंसारी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से स्थिति बहुत भयावह हो जाती है। पिछले साल की आपदा का डर आज भी हमारे दिलों में ताजा है। प्रशासन को इस संवेदनशील तोक के लिए जल्द से जल्द कोई स्थायी और मजबूत समाधान निकालना चाहिए।
देव राम, ग्रामीण
सूचना मिलते ही संबंधित ठेकेदार को कड़े निर्देश दे दिए गए हैं। जल्द ही पुल की मरम्मत का कार्य पूरा कर मार्ग को पुनः बहाल कर लिया जाएगा, ताकि ग्रामीणों को आवागमन में राहत मिल सके।
आर चंद्रा, ईई, ग्रामीण निर्माण विभाग बागेश्वर