पतित पावनी सरयू और गोमती नदियों के संगम स्थल पर स्थित ऐतिहासिक नुमाइशखेत में धार्मिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक महत्व के उत्तरायणी मेला एवं विकास प्रदर्शनी का उद्घाटन जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि यही वह स्थल है जहां पर कुली बेगार प्रथा का अंत हुआ था। पौराणिक, धार्मिक और व्यापारिक महत्व का यह मेला उत्तराखंड ही नहीं बल्कि पूरे देश में पहचान रखता है।
डीएम ने कहा कि यह मेला स्वतंत्रता संग्राम की झलक दिखाता है। इस धरोहर को संरक्षित रखने के प्रयास करने चाहिए। उन्होंने सरयू और गोमती नदियों की पवित्रता का ध्यान रखने का आह्वान भी किया। पुलिस अधीक्षक सुखवीर सिंह और एसडीएम एसएस राणा ने भी लोगों से मेले के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग देने का आह्वान किया। इस मौके पर स्कूली छात्राओं ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए।
कुमाऊं रेजीमेंट के जवानों ने बैंड धुन का प्रदर्शन किया। मेलाधिकारी एवं मेला सचिव ईओ आईएस रावत ने जिलाधिकारी और एसपी का शाल ओढ़ाकर स्वागत किया। इस मौके पर अपर जिलाधिकारी एसएस जंगपांगी, जिला विकास अधिकारी केएन तिवारी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद थे। मंच का संचालन जयंत भाकुनी ने किया।
उत्तरायणी मेला और विकास प्रदर्शनी 18 जनवरी तक चलेगी। इस दौरान कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे। 15 जनवरी को किशन महिपाल नाइट, 16 जनवरी को पप्पू कार्की नाइट, 17 जनवरी को गोविंद दिगारी नाइट और 18 जनवरी को पुष्कर महर नाइट आयोजित होगी। इसके अलावा विभिन्न प्रकार की खेलकूद प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाएंगी।
जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने मंच से अपने संबोधन में लोगों से आगामी 15 फरवरी को मताधिकार का प्रयोग करने का आह्वान किया। इस दौरान स्कूली बच्चों ने मतदाता जागरूकता समन्वयक डा.हरीश दफौटी, कैलाश प्रकाश चंदोला, आलोक पांडेय द्वारा मतदाता जागरूकता को लेकर रचित लोकगीत प्रस्तुत किया।
विधान सभा चुनावों को लेकर लागू आचार संहिता ने इस वर्ष उत्तरायणी मेले के मंच से नेताओं को दूर रखा। कार्यक्रम स्थल पर होने के बावजूद किसी भी नेता ने मंच से संबोधन नहीं किया। जिलाधिकारी ने मेले की तैयारी बैठक में ही मेला मंच का राजनीतिक उपयोग नहीं करने के निर्देश दिए थे।
नुमाइशखेत में शुरू हुए ऐतिहासिक उत्तरायणी मेले के उद्घाटन अवसर पर मैदान में बना पंडाल खचाखच भरा रहा। सांस्कृतिक कार्यक्रमों को देखने के लिए बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे पहुंचे थे। मेले में झूले, चरखे भी लगाए गए हैं।