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सामूहिक प्रयासों से तय होगी उत्तराखंड की दशा और दिशा

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बागेश्वर/कपकोट। उत्तराखंड की दशा और दिशा विषय पर कपकोट में गोष्ठी का आयोजन किया गया। अल्मोड़ा, बागेश्वर और कपकोट के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े वक्ताओं ने गोष्ठी में शामिल होकर अपने विचार रखे। वक्ताओं ने राज्य की दशा और दिशा तय करने के लिए सामूहिक प्रयासों की वकालत की। शहीदों के सपनों का उत्तराखंड नहीं बनने पर चिंता भी जताई।
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कपकोट बाजार के एक होटल में हुई गोष्ठी का आगाज उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष पीसी तिवारी ने किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश से अलग राज्य बनाने के लिए चले आंदोलन में कई लोगों ने जान की बाजी लगा दी, लेकिन हम शहीदों के सपनों का उत्तराखंड नहीं बना सके। प्रदेेश में माफिया राज बढ़ता जा रहा है। जल, जंगल और जमीन के मुद्दे हाशिये पर चले गए हैं।
उत्तराखंड अधिवक्ता महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह भंडारी ने कहा कि विश्व में राज्य की अलग सांस्कृतिक पहचान है, जिसे हम धीरे-धीरे खोते जा रहे हैं। संगठित होकर ही हम अपनी विरासत और पहचान को बचा सकते हैं। पूर्व विधायक ललित फर्स्वाण ने कहा कि लोकतंत्र धीरे-धीरे दम तोड़ रहा है। तानाशाही हावी होती जा रही है। देवभूमि का विकास भी राजनीतिक दांव-पेंचों के बीच फंसकर रह गया है। सवाल संगठन के अध्यक्ष रमेश पांडेय कृषक ने कहा कि राज्य की असल पहचान गैरसैंण राजधानी बनने से होगी। जब तक गैरसैंण को स्थायी राजधानी का दर्जा नहीं मिलता, उत्तराखंड पहाड़ी राज्य की पहचान नहीं बना पाएगा। सीनियर सिटीजन संगठन के अध्यक्ष दलीप खेतवाल ने जिले में खड़िया का भंडार होने के बावजूद स्थानीय युवाओं को रोजगार नहीं मिलने को चिंताजनक बताया। गोष्ठी का संचालन ग्रामीण उत्थान समिति के सचिव उमेश जोशी ने किया। गोष्ठी में इंद्र सिंह परिहार, बालादत्त तिवारी, सुंदर सिंह मेहरा, नरेंद्र खेतवाल, हीरा सिंह ऐठानी, अर्जुन भट्ट, डॉ. शेर सिंह ऐठानी आदि मौजूद रहे।
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