बागेश्वर में कपकोट से वापस लौटता यूक्रेन के पर्यटकों का दल।
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सरकार पर्यटन विकास के भारी दावे कर रही है। नए टूरिस्ट डेस्टीनेशन विकसित करने की योजना बनाई जा रही है। वहीं, सुप्रसिद्ध और पुराने पर्यटक स्थलों की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। सरकार की इसी बद इंतजामी से वास्ता पड़ा तो पिंडारी ट्रैक के लिए आए यूक्रेन के 13 पर्यटकों को मासूस होकर वापस लौटना पड़ा। द्वाली-ग्लेशियर पैदल पुल अभी तक न बनने से ये पर्यटक पिंडारी नहीं जा सके। ग्लेशियर पुल टूटने के पांच साल बाद भी नहीं बना तो विदेशी पर्यटकों के अरमान भी टूटे। बैरंग लौटे विदेशी पर्यटक देश के सुप्रसिद्ध पर्यटन स्थल से क्या संदेश लेकर गए होंगे, इसे बखूबी समझा जा सकता है।
यूक्रेन के 13 पर्यटकों का दल इन दिनों भारत में पर्यटन के लिए आया है। इस बीच उन्होंने बागेश्वर के पिंडारी ग्लेशियर पर ट्रैकिंग की योजना बनाई और यहां पहुंच गए। लेकिन पता चला कि ग्लेशियर को जोड़ने वाला पुल टूटा है। अभी तक अस्थाई पुल तक नहीं बन पाया है। इससे उन्हें बेहद निराशा हुई। द्वाली से पहले विदेशी पर्यटकों को पिंडारी ट्रैकिंग के बिना वापस लौटना पड़ा। हालांकि इससे पहले उन्होंने पखुवा बुग्याल, पखुवा टॉप, धाकुड़ी के चिल्ठा मंदिर, खाती आदि स्थलों की सैर की। लेकिन सरकार की बद इंतजामी के चलते विश्व प्रसिद्ध पिंडारी ग्लेशियर में ट्रैकिंग से वंचित रहना पड़ा।
विदेशी पर्यटकों के दल का नेतृत्व कर रही हिमालयन योगा यूक्रेन संस्था की अध्यक्ष सती माता का कहना है कि वे बड़ी उम्मीद और जोश के साथ पिंडारी दर्शन के लिए आए थे। लेकिन यहां नहीं पहुंच पाने का उन्हें हमेशा मलाल रहेगा।
दल के सभी सदस्य ग्लेशियर पर ट्रैकिंग के लिए बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। उन्हें बेहद मायूसी हुई है। दल के गाइड हिमांशु पांडे का कहना है कि पुल न बनने से देसी और विदेशी मेहमान पिंडारी से वंचित हो गए हैं। पर्यटकों को यहां से खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।
पांच साल बाद फिर नहीं बन सका पुल
बागेश्वर। बागेश्वर जिले के कपकोट में बसा पिंडारी ग्लेशियर भारत का जानामाना ट्रैकिंग रूट है। यहां हर साल बड़ी तादाद में देसी-विदेशी पर्यटक आते हैं। लेकिन पिछले कुछ सालों से पर्यटक स्थल पिंडारी को ग्रहण लगा है। वर्ष 2013 की आपदा में द्वाली समेत कई स्थानों पर कफनी और पिंडर नदी पर बने पैदल पुल बह गए थे। लेकिन आज तक इन पुलों का निर्माण नहीं कराया जा सका है। अन्य पुलों का निर्माण तो दूर सरकार पिंडारी ग्लेशियर को जोड़ने वाले पैदल पुल का निर्माण तक नहीं करा पाई है। इससे क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों की कमर टूट गई है। पर्यटन व्यवसाय ठप होने की कगार पर आ गया है।