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दो महीने से मुसीबत झेल रहे उच्च हिमालयी क्षेत्र के गांव

Sun, 23 Aug 2015 12:53 AM IST
ब्यूूराे, अमर उजाला, बागेश्वर।
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सोंग बदियाकोट और कपकोट-कर्मी सड़क दो महीने से बंद होने के कारण उच्च हिमालयी क्षेत्र के दर्जनों गांव तहसील मुख्यालय से अलग-थलग पड़े हैं। सड़कों के बंद होने से लोगों को दूध, फल और सब्जियां भी नसीब नहीं हैं।
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खच्चरों की पीठ पर लादकर पहुंचने वाले सामान के दाम आसमान छू रहे हैं। कुंवारी और बोरबलड़ा के लोग तो जरूरी सामान के लिए 58 किमी दूर थराली (चमोली गढ़वाल) जाने को मजबूर हैं। क्षेत्र में आधे दर्जन से अधिक जीपें फंसी हैं।

मालूम हो कि पीएमजीएसवाई की सोंग-बदियाकोट और लोनिवि की कपकोट-कर्मी सड़क गत दो महीने पहले हुई भारी बारिश से सापुली, शम, भयांत, विनायक, धूर और तीख आदि स्थानों पर जगह जगह भूस्खलन, पहाड़ी खिसकने और गधेरों के तेज बहाव के कारण बंद हो गई थीं।
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लोनिवि ने जेसीबी चलाकर सड़क खोलने का प्रयास भी किया, लेकिन मौसम खराब होते ही सड़क फिर से बंद हो जा रही है। पीएमजीएसवाई ने सड़क खोलनेे के अभी तक ठोस प्रयास नहीं किए हैं।

सड़कों के बंद होने के कारण बोरबलड़ा, झारकोट, कुंवारी, बदियाकोट, कालो, किलपारा, सोराग, बाछम, खाती, तीख, उगियां, डौला और कर्मी के ग्रामीणों को 10 से 51 किमी का पैदल सफर करके ब्लाक मुख्यालय कपकोट पहुंचना पड़ रहा है। यातायात ठप होने से ग्रामीणों को भारी कष्ट झेलने पड़ रहे हैं।

कपकोट और भराड़ी की बाजार से खच्चरों की पीठ में लादकर सामान लाने में ग्रामीणों को डेढ़ सौ रुपये प्रति क्विंटल भाड़ा देना पड़ रहा है। इससे ग्रामीणों के सामने नई मुसीबत खड़ी हो गई है।

कुंआरी और बोरबलड़ा जैसे सुदूरवर्ती गांवों के लोग 58 किमी पैदल दूर थराली (चमोली गढ़वाल) से जरूरी सामान लाने को मजबूर हैं। खाती के अस्पताल में ऐलोपैथिक डाक्टर नहीं हैं।

 बीमार लोगों को उबड़ खाबड़ रास्तों से डोली में बैठाकर कपकोट के अस्पताल लाने में ग्रामीणों के पसीने छूट रहे हैं। क्षेत्र के स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है।

राजस्व उपनिरीक्षक भुवन लाल वर्मा को दैवी आपदा की सूचना तहसील तक पहुंचाने में खासी मशक्कत करनी पड़ रही है।

बदियाकोट के ग्राम प्रधान केदार सिंह दानू, बीडीसी सदस्य खिलाफ दानू और शेर सिंह दानू ने बताया कि उन्होंने सड़कों को खोलने की कई बार मांग कर दी है, लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हो सकी है।

सड़कों के बंद होने के कारण पिंडर घाटी के कुछ गांवों में तीसरे दिन तो कुछ में चौथे दिन डाक सामग्री पहुंच रही है। समय पर डाक नहीं मिलने के कारण बेरोजगारों को साक्षात्कार के लिए बुलावा पत्र भी नहीं मिल पा रहे हैं। जिससे उनका भविष्य भी अंधकारमय हो गया है।

बीएसएनएल ने पिंडर घाटी के गांवों की सुविधा देने के लिए धूर में मोबाइल फोन टावर खड़ा किया है, लेकिन इससे सिग्नल नियमित नहीं आते हैं। जिससे क्षेत्र की घटनाओं की सूचना समय पर तहसील प्रशासन को नहीं मिल पाती है।
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