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नरगोली गांव में बीमारी से दो दुधारू भैंसों की मौत

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प्रतीकात्मक फोटो।
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बागेश्वर/कांडा। कांडा के नरगोली गांव में दो दुधारू भैसों की मौत हो गई। भैंसों को गले में इंफेक्शन हो गया था। जिसका उपचार चल रहा था। भैंसों का दूध बेचकर पशुपालक रोजी-रोटी कमाते थे। अब उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। पशुपालकों ने विभाग से मुआवजा दिलवाने की मांग की है।
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नरगोली गांव की विधवा महिलाएं देवकी देवी और पुष्पा देवी भैंस का दूध बेचकर अपने परिवार का पालन-पोषण करती थीं। बीते शुक्रवार को अचानक देवकी देवी की भैंस मर गई। शनिवार की सुबह पुष्पा देवी की भैंस भी मर गई। पशुपालकों ने बताया कि भैंस बीमार थी। जिनको देखने पशुपालन विभाग के कर्मचारी आए थे। उनका इलाज भी चल रहा था, लेकिन अचानक दोनों भैंसों ने दम तोड़ दिया। कहा कि दुधारु पशुओं की मौत से उनकी आजीविका का साधन छिन गया है।
भैंसों के मरने की सूचना तत्काल महिलाओं ने कांडा पशुपाल विभाग को दी। पशुसेवा केंद्र भेटा में तैनात पशुधन प्रसार अधिकारी हरीश बोरा मौके पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि तीन दिन पहले भी भैंसों को देखकर गए थे। उनका उपचार भी चल रहा था। बताया कि भैंसों के गले में इंफेक्शन था। गले में परेशानी होने से भैंस चारा नहीं खा पा रही थीं। कहा कि बीमारी की सूचना भी देरी से मिली, जिसके चलते इलाज शुरू होने के बावजूद भैसों को बचाया नहीं जा सका। इधर ग्रामीणों ने गांव में शिविर लगाकर अन्य पशुओं की जांच करने और प्रभावित परिवार को मुआवजा दिलाने की मांग की।
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नरगोली गांव में अगर पशुओं में संक्रामक बीमारी होने की सूचना होगी तो शिविर लगाकर पशुओं की जांच की जाएगी। अगर पशुपालकों ने बीमा करवाया होगा तो उन्हें क्लेम मिल सकता है। शासन की ओर से बीमारी से मरने वाले पशुओं का मुआवजा देने का कोई प्रावधान नहीं है।
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डॉ. उदय शंकर, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, बागेश्वर।
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