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गलाघोंटू से पीड़ित दो बच्चे हायर सेंटर रेफर

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बागेश्वर। कपकोट के जगथाना गांव में गलाघोंटू (डिप्थीरिया) से सोमवार को एक बच्चे की मौत हो गई। रोग पीड़ित दो बच्चों को हायर सेंटर रेफर किया गया है।
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जगथाना (कपकोट) निवासी कृष्णा (8) पुत्र प्रताप सिंह की सोमवार को डिप्थीरिया के कारण जिला अस्पताल में मौत हो गई थी। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मनीष पंत ने बताया कि बच्चे में डिप्थीरिया के लक्षण पाए गए थे। अस्पताल लाने से पहले बच्चे का निजी चिकित्सक से इलाज कराया गया था। अगर समय पर सरकारी अस्पताल लाया गया होता तो बच्चे को बचाया जा सकता था। मंगलवार को प्रताप सिंह की दोनों बेटियों तनुजा (4), भूमिका (10) की तबीयत भी बिगड़ गई। परिजन उन्हें इलाज के लिए जिला अस्पताल लाए। जांच के बाद बच्चों को अस्पताल में भर्ती किया गया। हालत गंभीर होने के चलते दोनों बच्चों को मंगलवार रात को ही हायर सेंटर रेफर कर दिया गया।
क्या है डिप्थीरिया, क्या है इलाज
बागेश्वर। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मनीष पंत ने बताया कि डिप्थीरिया एक संक्रामक रोग है। बच्चों के साथ बड़ों को भी यह बीमारी हो सकती है। गले में सूजन, दर्द, खरांस, बुखार इस रोग के लक्षण हैं। इससे बचने के लिए बच्चों को डेढ़ से साढ़े तीन साल तक के बीच पेंटावेलेंट के तीन टीके लगाए जाते हैं। जिन बच्चों को ये टीके नहीं लगे होते हैं, उनमें डिप्थीरिया होने की आशंका ज्यादा रहती है। डिप्थीरिया होने पर एंथ्रोमाइजीन टेबलेट दी जाती है। हालत ज्यादा खराब होने पर एंटी टॉक्सिन का इंजेक्शन लगाया जाता है। जिला अस्पताल में एंटी टॉक्सिन नहीं होने के कारण रोगियों को रेफर करना पड़ रहा है।
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स्वास्थ्य टीम जगथाना भेजने पर निर्णय नहीं ले पाए अधिकारी
बागेश्वर। कपकोट के जगथाना गांव में डिप्थी रिया से बच्चे की मौत और दो बच्चों के इस बीमारी से पीड़ित होने की पुष्टि के बाद भी स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी गांव में स्वास्थ्य टीम भेजने का निर्णय नहीं ले पाए हैं। इस संबंध में सीएमओ डॉ. बीडी जोशी का कहना है कि जिला अस्पताल के सीएमएस को गांव में स्वास्थ्य टीम भेजने को पत्र लिखा गया है। वहीं सीएमएस डॉ. एलएस टोलिया का कहना है कि जगथाना गांव में गलाघोंटू (डिप्थीरिया) से मौत होने की पुष्टि हो गई है। सीएमओ साहब को टीम गांव भेजकर वहां टीकाकरण करना चाहिए। गांव में टीके लग रहे हैं या नहीं इसका पता लगाना चाहिए। कुल मिलाकर गांव में टीम भेजने का निर्णय अधिकारी नहीं ले पाए हैं।
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एंटी टॉक्सिन इंजेक्शन मंगाने को लेकर भी कोई निर्णय नहीं
बागेश्वर। जिला अस्पताल के डाक्टर गलाघोंटू (डिप्थीरिया) बीमारी में एंटी टॉक्सिन इंजेक्शन कारगर बता रहे हैं लेकिन जिला अस्पताल में यह इंजेक्शन उपलब्ध नहीं हैं। इसकी वजह से दो बच्चों को हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल रेफर करना पड़ा है। इंजेक्शन के संबंध में सीएमओ डॉ. बीडी जोशी का कहना है कि जिला अस्पताल प्रबंधन को इंजेक्शन मंगाना चाहिए। वहीं सीएमएस डॉ. एलएस टोलिया कहते हैं कि एंटी टॉक्सिन इंजेक्शन काफी महंगा होता है। कितनी कीमत है, इसका पता लगाया जाएगा। यदि बागेश्वर में यह इंजेक्शन लगाना संभव हुआ तो मंगाया जाएगा।
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