बागेश्वर। वन पंचायत संघर्ष मोर्चा के बैनर तले वन पंचायत सरपंचों का दो दिनी प्रशिक्षण संपन्न हुआ। प्रशिक्षण में तीनों विकासखंडों के 75 सरपंचों ने वन अधिकार कानूनी अधिनियम 2006 को प्रभावी रूप से क्रियान्वित करने के बारे में मंथन किया।
नदीगांव स्थित एक होटल में आयोजित प्रशिक्षण की अध्यक्षता संघर्ष मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष पूरन सिंह रावल ने की। मोर्चा के संयोजक तरुण जोशी के वन अधिकार कानून की आवश्यकता की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वन पंचायत का गठन एक ऐतिहासिक फैसला था। वर्ष 1930-31 में जो अधिकार वन पंचायत के माध्यम से लोगों को मिले थे। आजादी के बाद उन्हें नियमावली संशोधन के नाम पर लगातार बदला गया। नियमावली बदलने के बाद वह सारे अधिकार लोगों के हाथ से निकाल दिए गए और पूरी स्वायत्तता समाप्त कर दी गई है। वन पंचायत को पुनः स्वरूप में लाने के लिए वन अधिकार कानून अहम है। इसके माध्यम से लोगों का रोजगार, स्थानीय संसाधनों पर लोगों की स्वायत्तता मजबूत होगी। इसे प्रभावी रूप से राज्य के भीतर लागू कराने के लिए सभी लोगों को संघर्ष करना होगा।
कार्यक्रम में मौजूद सरपंचों ने वन पंचायत की लीसे और अन्य वन उपज की रॉयल्टी 2014 से अभी तक नहीं मिलने पर नाराजगी जताई और डीएफओ को पत्र लिखकर जल्द भुगतान करने की मांग की। इस मौके पर मदन मोहन उपाध्याय, बसंत पांडेय, जगन्नाथ पांडेय, मोहन सिंह दानू, आनंदी देवी, मालती देवी, प्रेमा देवी, गिरिजा शंकर पांडेय, विजय मोहन सिंह आदि मौजूद रहे।