बागेश्वर। इस साल मौसम के रुख में आए बदलाव ने समाज के हर वर्ग को प्रभावित किया है। किसान अनाज की बर्बादी से परेशान है, बीमारियां बढ़ने से लोगों की दिक्कत बढ़ गई है। पर्यटकों की आवाजाही ठप होने से टूरिस्ट गाइड और पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों को भी नुकसान उठाना पड़ रहा है। हालात यह हैं कि गर्मी के महीने में ट्रैकरों की मौजूदगी वाले पिंडारी, सुंदरढूंगा और कफनी ग्लेशियरों के रूट सुनसान पड़े हैं। सैलानियों की चहल-पहल से गुलजार रहने वाली पर्यटन नगरी में इन दिनों रौनक नहीं है।
मार्च से तापमान में बढ़ोतरी शुरू हो जाती है। अप्रैल, मई और जून के महीनों में महानगरों में भीषण गर्मी पड़ती है। इन दिनों सैलानी ठंडे पहाड़ी क्षेत्रों के सैर-सपाटे पर निकल पड़ते हैं। कौसानी के होटल कारोबारी और ग्लेशियरों की सैर कराने गाइड की आजीविका पर्यटकों और ट्रैकर पर निर्भर रहती है।
बारिश के कारण उठाना पड़ रहा नुकसान
बागेश्वर। प्रांतीय उद्योग व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष और होटल कारोबारी बलवंत (बबलू) नेगी बताते हैं कि अप्रैल का महीना सुनसान रहा। मई में भी आसार ठीक नहीं है। कौसानी के अधिकांश होटल खाली हैं। अग्रिम बुकिंग भी उम्मीद जगाने वाली नहीं है। गर्मी में गुलजार रहने वाला कौसानी इस साल सैलानियों का इंतजार ही कर रहा है। उम्मीद है कि अब मौसम साफ रहेगा। गर्मी की छुट्टियों पर भी सैलानियों के आने की आस है।
जून के बाद भी खुले रहने चाहिए ग्लेशियर
बागेश्वर। ग्लेशियर गाइड और ट्रैकर दिनेश सिंह दानू कहते हैं कि मौसम की मार से आधा कारोबार प्रभावित हो गया है। खाती, वाछम के लोगों की आजीविका पिंडारी, सुंदरढूंगा और कफनी ग्लेशियर आने वालों से चलती है। ग्लेशियरों में 15 जून के बाद जाने पर रोक लग जाती है। इस बार प्रशासन को तिथि आगे बढ़ानी चाहिए ताकि क्षेत्र के लोगों का रोजगार चल सके।
बदले मौसम ने ग्लेशियरों को दी संजीवनी
बागेश्वर। बेमौसम बारिश ने जहां खेतीबाड़ी को नुकसान पहुंचाया है वहीं पर्यटन विभाग इसे ग्लेशियरों के लिए संजीवनी मान रहा है। विभाग को उम्मीद है कि ऊंचाई वाले स्थानों पर गर्मी के दिनों में हुई बारिश से ग्लेशियर बर्फ से लकदक रहेंगे। इस साल ग्लेशियरों की ओर जाने वाले ट्रैकरों को अन्य वर्षों की तुलना में अधिक बर्फ मिलेगी।
जिले के विश्व प्रसिद्ध ग्लेश्यिर पिंडारी, कफनी और सुंदरढूंगा देश-विदेश के ट्रैकरों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। इन ग्लेशियरों को फतह करने के लिए देश के पश्चिम बंगाल, गुजरात, महाराष्ट्र आदि राज्यों समेत अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, नीदरलैंड आदि देशों से ट्रैकर हर साल आते हैं। हिमालयी गांवों के लोग गाइड, पोर्टर के काम से अपनी आजीविका चलाते हैं। हालांकि इस साल बारिश के कारण अधिकांश समय ग्लेशियरों के लिए आवाजाही बंद रही है। बावजूद इसके पर्यटन विभाग को उम्मीद है कि आने वाले डेढ़-दो महीने में अच्छी संख्या में ट्रैकर यहां आएंगे और उन्हें पिछले वर्षों की तुलना में अधिक बर्फ देखने को मिलेगी।
जिला पर्यटन विकास अधिकारी कीर्ति चंद्र आर्या कहते हैं कि मार्च और अप्रैल में ग्लेशियरों में अच्छी बर्फबारी हुई है। पिंडारी के जीरो प्वाइंट से आगे कम दूरी करने पर ही बर्फ के दीदार हो जाएंगे। ग्लेशियर में बर्फ की कमी से दिखने वाले काले पहाड़ इस साल कम दिखेंगे और ट्रैकर के लिए यह वातावरण उत्साहजनक रहेगा।