उरेडा ने निकट भविष्य मेें जिले में तीन हजार किलोवाट पन बिजली पैदा करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए शासन को चार परियोजनाओं के प्रस्ताव भेजे गए हैं।
बिजली का उत्पादन होने पर इसे ग्रिड के साथ जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। बागेश्वर जिले में इस समय 56 गांवों को उरेडा की जल विद्युत परियोजनाओं के साथ जोड़ा गया है।
इनमें से अधिकतर गांव कपकोट के उच्च हिमालयी इलाके में हैं। इन गांवों में स्थानीय स्तर की परियोजनाओं का संचालन ग्रामीणों की समितियों के माध्यम से किया जाता है और उपभोक्ताओं को सुबह और शाम के समय बिजली दी जाती है।
अभी तक यहां एक मेगावाट विजली पैदा हो रही है। इनके अलावा अन्य परियोजनाओं को ग्रिड के साथ जोड़ा गया है। उरेडा के परियोजना प्रबंधक ओम कुमार ने बताया कि चार नई परियोजनाओं के प्रस्ताव शासन को भेजे गए हैं। इनमें सूपी के पतियासार में सरयू पर एक मेगावाट की बिजली पैदा करने का लक्ष्य है।
दूसरी परियोजना सरयू से लगे कनलगड़ गधेरे से प्रस्तावित है। इसके बनने से 700 किलोवाट बिजली मिलेगी। जगथाना के उडियार में स्थानीय श्रोत से 200 किलोवाट बिजली के उत्पादन का प्रस्ताव है। पिंडर नदी से सोराग में एक हजार किलोवाट की परियोजना बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।
उन्होंने बताया कि इन परियोजनाओं के पहले चरण की सर्वे करके प्रस्ताव दिया गया है। अगली सर्वे भी शीघ्र होने की उम्मीद है। इसके बाद ही धन आवंटन और निर्माण की प्रक्रिया आरंभ हो सकेगी।
इन परियोजनाओं के बनने के बाद उत्पादित बिजली पावर कारपोरेशन की ग्रिड के साथ जोड़ी जाएगी। उत्पादन के लाभ का 25 प्रतिशत अंश ग्रामीणों की स्थानीय समितियों को दिया जाएगा।
परियोजना प्रबंधक ने बताया कि सरकार सोलर लाइट परियोजनाओं को प्रोत्साहित कर रही है। पंत क्वैराली के ग्रामीणों की पहल पर वहां दो हजार किलोवाट का सोलर प्लांट लगाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है।