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ढाई साल से जिले के तीन आईटीआई केंद्रों पर लटके हैं ताले

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प्रतीकात्मक फोटो।
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बागेश्वर। जिले के तीन औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) का बंद होना युवाओं को तकनीकी शिक्षा की दौड़ में पीछे कर रहा है। अगस्त 2018 से तीन आईटीआई केंद्रों में ताले जड़े हैं। युवाओं को तकनीकी शिक्षा ग्रहण करने के लिए जिले से बाहर जाना पड़ रहा है।
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बागेश्वर जिले में पांच औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान हैं। इनमें दो संस्थान केंद्र और तीन राज्य सरकार की ओर से संचालित हैं। राज्य सरकार की ओर से संचालित तीनों आईटीआई केंद्रों पर अगस्त 2018 से ताले लटके हैं। जिले के युवाओं को आसानी से तकनीकी शिक्षा दिलाने के लिए वर्ष 2011 में कठपुड़ियाछीना, नाकुरी और वर्ष 2014 में गरुड़ में आईटीआई संस्थान खोले गए थे। कुछ सालों तक इनमें तननीकी शिक्षा का प्रशिक्षण दिया गया।
अगस्त 2018 से तीनों आईटीआई बंद पड़े हैं। अचानक इन संस्थानों के बंद होने से छात्र-छात्राओं के साथ अभिभावक भी परेशान हैं। आर्थिक रूप से कमजोर अभिभावक अपने बच्चों को तकनीकी शिक्षा नहीं दिला पा रहे हैं। इन संस्थानों में इलेक्ट्रीशियन, कंप्यूटर ऑपरेटर, कटिंग, फिटर, वेल्डर आदि का प्रशिक्षण दिया जा रहा था। इस अवधि में प्रशिक्षण प्राप्त कई युवाओं को अच्छा रोजगार भी मिला लेकिन वर्तमान में इनके बंद हो जाने से युवा वर्ग परेशान है।
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उन्हें तकनीकी शिक्षा के लिए अल्मोड़ा, हल्द्वानी, दिल्ली, देहरादून आदि शहरों में जाना पड़ता है। संस्थानों का बंद होना युवाओं के लिए बेरोजगारी का कारण भी बन रहा है। बिना तकनीकी शिक्षा के उन्हें कहीं भी रोजगार नहीं मिल रहा है। रोजगार मेले भी उनके लिए व्यर्थ साबित हो रहे हैं।
राज्य सरकार की ओर से संचालित जिले के तीनों आईटीआई संस्थान बंद कर दिए गए हैं। राज्य सरकार के फैसले के अनुरूप इनको बंद किया गया है। सरकार के फैसले पर ही इन्हें दोबारा खोलने की प्रक्रिया हो सकती है। - कवींद्र सिंह कन्याल, प्रधानाचार्य आईटीआई कांडा।
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