कौसानी का विकास रुकने से चिंतित लोग
- फोटो : अमर उजाला
कौसानी (बागेश्वर)। सजग नागरिकों की कौसानी स्थित पंत वीथिका में चिंतन सभा हुई। इसमें क्षेत्र के विकास, रोजगार, पलायन सहित विभिन्न मुद्दों पर विचार विमर्श हुआ। वक्ताओं ने कहा कि पर्यटन नगरी कौसानी के दो जिलों में शामिल होने से समुचित विकास नहीं हो पा रहा है।
नैनीताल हाईकोर्ट के एडवोकेट और सिविल सोसायटी गरुड़ के अध्यक्ष डीके जोशी की पहल पर आयोजित चिंतन बैठक में पहाड़ के विभिन्न सवालों पर चिंतन मनन किया गया। जोहार सिंह बिष्ट ने कहा कि महात्मा गांधी ने कौसानी को भारत का स्विट्जरलेंड कहा था। यहां पर हर साल हजारों पर्यटक आते हैं लेकिन सुविधाएं नगण्य हैं।
उन्होंने इसके लिए कस्बे के बागेश्वर, अल्मोड़ा जिले में बंटा होने को प्रमुख कारण बताया। कहा कि कौसानी कस्बे को एक ही जिले में शामिल किया जाना चाहिए ताकि मास्टर प्लान से आगे का विकास हो सके। बैठक में पहाड़ में बढ़ते जंगली जानवरों की समस्या को चिंताजनक बताया।
कहा कि बंदरों के कारण खेती उजड़ रही है, लेकिन अभी तक ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। लीलाधर पांडेय ने पहाड़ में जड़ी-बूटी को रोजगार से जोड़ने पर बल दिया। बसंती बहन ने वन पंचायतों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की बात कही। सभा में बढ़ती नशाखोरी की प्रवृत्ति पर चिंता जताई गई।
एडवोकेट जोशी ने नशामुक्त समाज बनाने के लिए सभी से आगे आने का आह्वान किया। इसके अलावा रोजगार, पलायन सहित अन्य विषयों पर चिंतन हुआ। इस दौरान पान सिंह, लक्ष्मी आश्रम की कांति बहन, बसंती बहन, अनिरुद्ध, अल्पा जड़ेजा, जोगेंद्र आदि ने अपने विचार रखे।