गरुड़ (बागेश्वर)। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बैजनाथ गरुड़ ब्लॉक के साथ ही चमोली जिले के सीमांत ग्रामीणों की लाइफलाइन है, लेकिन इस केंद्र में सुविधाओं के नाम पर मरीजों को सिर्फ मायूसी मिल रही है। 150 से 300 की ओपीडी वाले इस अस्पताल में न तो पर्याप्त बेड हैं और न ही विशेषज्ञ डॉक्टर। आलम यह है कि छोटी सी चोट लगने पर भी मरीजों को 25 किलोमीटर दूर जिला अस्पताल जाने को मजबूर होते हैं।
अस्पताल में मात्र दो बेड का इमरजेंसी वार्ड संचालित है। क्षेत्र के लोग लंबे समय से इमरजेंसी में पांच बेड स्थापित करने की मांग कर रहे हैं। अस्पताल में महिला रोग विशेषज्ञ न होने से गर्भवती महिलाओं की जान जोखिम में रहती है। प्रसव और अन्य जांच के लिए उन्हें भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। हड्डी रोग विशेषज्ञ के अभाव में फ्रैक्चर होने पर प्लास्टर तक की सुविधा नहीं मिल पा रही है। अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट नहीं होने से सप्ताह में केवल तीन दिन ही मरीजों और गर्भवतियों को अल्ट्रासाउंड की सेवा का लाभ मिल रहा है।
अस्पताल में मरीजों के लिए दो एंबुलेंस तो हैं, लेकिन चलाने के लिए चालक केवल एक है। कई बार आपात स्थिति में एंबुलेंस खड़ी रह जाती है। जानकारी के अनुसार जनवरी माह में यहां तैनात सात बाडंधारी चिकित्सक पीजी के लिए जाने वाले हैं। यदि नए डॉक्टरों की तैनाती नहीं हुई, तो स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह चरमरा जाएंगी।