बागेश्वर। सिया गांव में स्रोत के पानी से डायरिया फैलने का स्वास्थ्य विभाग ने जो अनुमान लगाया था वह सही साबित हो रहा है। जल संस्थान की ओर से जांच के लिए भेजे गए सैंपल में नौले का पानी प्रदूषित पाया गया है। विभाग की ओर से नौले में क्लोरीनेशन कराया है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव जाकर सभी मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण किया।
बीते शुक्रवार को काफलीगैर तहसील के सिया गांव में डायरिया से पांच वर्षीय निकिता की मौत हो गई थी जबकि 16 लोग बीमारी की चपेट में आ गए थे। सात लोगों को एक दिन के लिए जिला अस्पताल में भर्ती किया गया था। स्वास्थ्य विभाग ने प्राकृतिक स्रोत के पानी को बीमारी का कारण माना था और नौले के पानी का सैंपल लेकर जल संस्थान को जांच के लिए दिया था।
जल संस्थान के अधिशासी अभियंता सीएस देवड़ी ने बताया कि नौले के आसपास गंदे पानी का जमाव होने और रिस कर नौले के पानी में मिलने से पानी पीने योग्य नहीं रह गया था। लैब से पानी के सैंपल के प्रदूषित होने की सूचना मिलने के बाद नौले में हाइपो क्लोराइड डाला गया है। ग्रामीणों से नौले के पानी का प्रयोग नहीं करने को कहा है। नौले के आसपास जमा पानी को साफ करने की सलाह दी है।
इधर, प्रभारी सीएमओ डॉ. पीएस जंगपांगी ने बताया कि सोमवार को डॉ. प्रमोद टम्टा और फार्मासिस्ट शिवराज मेहता ने सिया गांव जाकर सभी मरीजों की जांच की। जांच में सभी लोग स्वस्थ पाए गए हैं।