बागीश चंद्राकर, लापता ट्रैकर।
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छह सितंबर से लापता छत्तीसगढ़ निवासी ट्रैकर को ढूंढने गई प्रशासन की टीम सुंगरढुंगा ग्लेशियर से खाली हाथ लौट आई है। जीरो प्वाइंट तक खोजने के बाद भी ट्रैकर का कोई सुराग नहीं लग पाया है। हालांकि युवक की तलाश में आए उसके रिश्तेदारों को तहसील प्रशासन ने दो गाइड और दो एसडीआरएफ के जवान मुहैया कराए हैं।
छत्तीसगढ़ के रायपुर से बागीश चंद्राकर (28) ट्रैकिंग के लिए पिंडर घाटी आया था। चार सितंबर को वह खाती गांव में रुका। पांच को उसकी लोकेशन जातोली में थी। बताया जा रहा है कि छह सितंबर की सुबह करीब 8:30 बजे वह सुंगरढुंगा ग्लेशियर के लिए निकला। इसके बाद से उसका कोई पता नहीं चल पा रहा है।
20 दिन बाद भी बागीश का फोन नहीं आने पर परिजनों ने उसकी खोज शुरू की। मामले के संज्ञान में आने के बाद कपकोट के एसडीएम रवींद्र बिष्ट ने बदियाकोट के पटवारी के नेतृत्व में पांच सदस्यीय टीम सुंदरढुंगा ग्लेशियर भेजी। रविवार को यह टीम जीरो प्वाइंट तक पहुंचने के बाद खाली हाथ लौट आई।
एसडीएम ने बताया कि सुंदरढुंगा तक जो टीम भेजी थी, उसे ट्रैकर के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी। उन्होंने बताया कि दो स्थानों पर पिंडर नदी के किनारे मार्ग बेहद खतरनाक है। इधर, छत्तीसगढ़ से कपकोट पहुंचे युवा ट्रैकर के दो रिश्तेदारों के आग्रह पर प्रशासन ने दो एसडीआरएफ के जवान और दो स्थानीय गाइड उनके साथ भेज दिए हैं। एसडीएम रवींद्र बिष्ट भी उनके साथ रविवार को खरकिया तक गए। उन्होंने बताया कि युवक के रिश्तेदार जातोली पहुंचे हैं।