भगवान बागनाथ की पौराणिक नगरी में कुमाऊं के सुप्रसिद्ध उत्तरायणी मेले की तैयारियां तेज हो गई हैं। इस बार मेला अवधि पांच दिन की बजाय सप्ताहभर होगी।
मेला 14 जनवरी से 20 जनवरी तक लगेगा। सरयू, गोमती नदी तल पर छोटे-बड़े लकड़ी के चार अस्थायी पुल बन चुके हैं। मेला स्थल पर स्वच्छता अभियान भी शुरू कर दिया है।
व्यापारियों को दुकानों का आवंटन और प्रदर्शनी मैदान में स्टॉलों के निर्माण के लिए जगह का निर्धारण शुरू हो गया है। सांस्कृतिक दल अपनी प्रस्तुति को निखारने के लिए दिन -रात मेहनत कर रहे हैं।
नगर में 14 जनवरी को उत्तरायणी मेेले का उद्घाटन करने के लिए मुख्यमंत्री हरीश रावत आ रहे हैं। मेले को भव्य, आकर्षक बनाने के लिए नगर पालिका परिषद मुस्तैदी से जुटी है।
बागनाथ मंदिर से ऐतिहासिक नुमाइशखेत मैदान में आने-जाने की सुविधा के लिए चार अस्थायी पुलों का निर्माण हो चुुका है। नगर पालिकाध्यक्ष गीता रावत ने बताया कि मेलार्थियों, व्यापारियों के मेला अवधि के बाद भी यहां जमे रहने के कारण मेला दो दिन के लिए बढ़ाया गया है। मेले के दौरान स्वच्छता व्यवस्था के लिए 30 पर्यावरणप्रेमी यहां पहुंच चुके हैं।
वह स्नानघाट, संगम स्थल को चमका रहे हैं। व्यापारियों को दुुकानें आवंटित कर दी गई हैं। विकास प्रदर्शनी के स्टॉलों के लिए जगह का निर्धारण किया जा रहा है। उन्होंने नागरिकों, व्यापारियों से मेले को भव्य, आकर्षक बनाने में पूरा सहयोग देने की अपील की है।
ईओ ईश्वर सिंह रावत ने कहा कि बाहर से बुलाए गए स्वच्छक यहां इस महीने तक रहेंगे। उन्होंने बताया कि छह जनवरी को झूला, चर्खा, जू वालों के लिए जगह निर्धारित होगी। लोनिवि की ओर से सड़कों के गड्ढों का भरान कर उसमें डामर किया जा रहा है।