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जंगल को उजाड़कर नहीं चाहिए सड़क

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बागेश्वर के जाखनी में पेड़ों से लिपटी महिलाएं। संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। जंगल बचाने के लिए जाखनी के ग्रामीणों का चिपको आंदोलन जारी है। महिलाओं ने इस आंदोलन की शुरूआत की थी, जिसे गांव के पुरुषों का भी पूरा समर्थन मिल रहा है। गांव के बुजुर्ग, युवा, बच्चे एक स्वर में सड़क के लिए पेड़ों को काटने का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि जंगल को उजाड़कर उन्हें सड़क नहीं चाहिए। ग्रामीणों ने पेड़ नहीं काटने का लिखित आश्वासन मिलने के बाद ही आंदोलन को समाप्त करने की चेतावनी दी।
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जाखनी के ग्रामीणों ने बृहस्पतिवार को भी प्रदर्शन कर शासन और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। ग्रामीणों ने कहा कि कई दशकों से जाखनी के बुजुर्गों ने इस जंगल को संरक्षित रखा है। हजारों पेड़ों का घना जंगल से गांव की पहचान है। इस जंगल के बीच से चौनाला गांव के लिए सड़क काटी जा रही है। ग्राम प्रधान ईश्वर सिंह मेहता और सामाजिक कार्यकर्ता हेमवंत सिंह मेहता ने कहा कि मजगांव तक सड़क का निर्माण हो चुका है। जाखनी के ग्रामीण जंगल की कीमत पर सड़क नहीं चाहते हैं। चौनाला गांव को सड़क बनाने का विरोध भी नहीं किया जा सकता है। ऐसे में प्रशासन को कमेड़ीदेवी-स्यांकोट मोटर मार्ग से चौनाला गांव तक सड़क कटान करना चाहिए। जिसमें गांव का जंगल भी बचा रहेगा और मोटर मार्ग का निर्माण भी बाधित नहीं होगा। शासन और प्रशासन से ग्रामीण लंबे समय से जंगल बचाने की गुहार लगा रहे थे, लगातार अनदेखी के बाद जंगल से सड़क की सर्वे कर दी गई। जिसके विरोध में ग्रामीण आंदोलन करने को बाध्य हुए हैं। ग्रामीणों ने कहा कि जब तक सक्षम अधिकारी आंदोलन स्थल पर आकर पेड़ों की सुरक्षा का आश्वासन लिखित में नहीं देगा आंदोलन जारी रहेगा। इस मौके पर जोगा सिंह मेहता, कल्याण सिंह मेहता, त्रिलोक मेहता, राजेंद्र मेहता, रेवती देवी, भवानी देवी, मानुली देवी, कविता देवी परमेश्वरी देवी, विनीता मेहता, मालती देवी, गीता मेहता आदि मौजूद रहे।
सालों से इन पेड़ों का बच्चों की तरह संरक्षण करती आई हूं। जंगलों से लगाव के चलते ही सरपंच का चुनाव लड़ा। सरपंच बनने के बाद अब इन पेड़ों के प्रति मेरी जिम्मेदारी बढ़ गई है। इन्हें बचाने के लिए प्राण भी देने पड़े तो पीछे नहीं हटूंगी। - कमला देवी, सरपंच, जाखनी
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बांज, बुरांश और उतीस के इस जंगल से गांव में पानी की कमी नहीं रहती है। कई प्राकृतिक स्रोत भूस्खलन से ध्वस्त होने के बावजूद गांव के लोगों को इन पेड़ों की बदौलत पर्याप्त पानी मिल रहा है। पेड़ काटे गए तो पेयजल संकट हो जाएगा। - सरोजिनी देवी, आंदोलनकारी महिला, जाखनी
पहाड़ों का अस्तित्व पेड़-पौधों से है। विकास के नाम पर पेड़ों पर आरी चलाने का पुरजोर विरोध किया जाना चाहिए। अगर पेड़ ही नहीं रहेंगे तो गांवों का अस्तित्व संकट में पड़ जाएगा। सड़क निर्माण के लिए वैकल्पिक स्थान खोजा जाना चाहिए। - इंद्रा देवी, आंदोलनकारी महिला, जाखनी
पूरे क्षेत्र में सड़क बनाने के नाम पर जंगलों का जमकर कटान हुआ है। जाखनी के जंगल पर भी आरी चलाने की तैयारी की जा रही है। हम ऐसा नहीं होने देंगे। अपने बच्चों की तरह पाले पेड़ों की रक्षा के लिए अंतिम सांस तक संघर्ष करेंगे। - मालती देवी, आंदोलनकारी महिला, जाखनी
एई बोले आगे नहीं होगा काम
बागेश्वर। बृहस्पतिवार को दोपहर बाद लोनिवि के अवर अभियंता पूरन सिंह फर्त्याल जाखनी गांव में चल रहे आंदोलन की सुध लेने पहुंचे। ग्रामीणों ने उन्हें मोटर मार्ग निर्माण में वास्तव में कट रहे पेड़ों को दिखाया। एई ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि मोटर मार्ग निर्माण के बीच में कहीं भी आबादी नहीं है। जंगल से सड़क काटने का विरोध हो रहा है। ऐसे में इस सर्वे से सड़क निर्माण करने का कोई औचित्य नहीं है। विभाग को जंगल से सड़क निर्माण नहीं करने की संस्तुति की जाएगी।
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