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अब बड़ी मंडियों में बेचे जाएंगे सहकारिता समूहों के उत्पाद

Fri, 09 Dec 2016 11:34 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो बागेश्वर
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क्रेता-विक्रेता कार्यशाला में उपस्थित सहकारिता से जुड़ी महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला
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 बागेश्वर जिले में एकीकृत आजीविका सहयोग परियोजना द्वारा गठित स्वायत्त सहकारिता समूहों के तैयार उत्पादों को बड़ी मंडियों में बेचा जाएगा। इससे अधिक उत्पादन होने पर उत्पादों को स्थानीय स्तर पर बाजार उपलब्ध नहीं होने की समस्या नहीं रहेगी। 
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गरुड़ में आयोजित क्रेता-विक्रेता कार्यशाला में परियोजना की तकनीकी इकाई के कृषि व्यवसाय अधिकारी नवीन भट्ट ने कहा कि ब्लॉक में छह सहकारिता समूहों के माध्यम से संचालित विभिन्न व्यावसायिक गतिविधियों के फलस्वरूप इस वर्ष  मसाले, धान व दुग्ध उत्पादन की मात्रा में वृद्धि हुई है। उत्पादन में बढ़ोतरी से स्थानीय बाजारों में इन उत्पादों की खपत कम होने लगी है। जिससे उत्पादों की बिक्री हेतु बड़े स्तर पर खरीददारों से संपर्क किया जा रहा है। परियोजना क्षेत्र में अदरक का 500 कुंतल पैदावार होने का अनुमान है।

जबकि धान की बढ़ी पैदावार को देखते हुए बैजनाथ व अन्नपूर्णा सहकारिता द्वारा उद्योग विभाग के सहयोग से दो राइस सेलर मिल की स्थापना की गयी है। कार्यशाला में एकीकृत आजीविका परियोजना के सहायक प्रबंधक प्रकाश पाठक ने गरुड़ ब्लॉक में संचालित परियोजना गतिविधियों, उपलब्धियों, भावी कार्ययोजना से क्रेता व विक्रेताओं को अवगत कराया। वर्तमान में एकीकृत आजीविका परियोजना 11 जनपदों के 42 ब्लॉकों में संचालित की जा रही है। जनपद बागेश्वर के तीनों ब्लॉकों में कुल 10035 परिवार आच्छादित किए गए हैं।
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बैठक में द गोट ट्रस्ट लखनऊ से संबद्ध क्षेत्रीय समन्वयक मनोज कुमार व निशा ने बकरी पालन व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए कि जा रहे कार्यक्रमों की जानकारी दी। कार्यशाला में एकीकृत आजीविका परियोजना के सहायक वीरेंद्र गुसांई, संजीवनी सहकारिता की अध्यक्ष हेमा अधिकारी, तकनीकी एजेंसी के समन्वयक काम सिंह फर्स्वाण, हरीश किरोला, प्रताप सिंह, धर्मराज तिवारी, देवानंद पाठक, सीमा भोज, चंपा देवी ने विचार रखे। 
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