नोट बंदी से सुदूरवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों में रह रहे लोगों को कई परेशानियां झेलनी पड़ रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में एक तो बैैैैंकों का अकाल है तो शाखा डाकघरों में पैसों की भारी कमी बनी हुई है।
बमुश्किल ग्रामीण मीलों चलकर बैंक में पहुंच भी गए तो उन्हें दो हजार रुपए ही मिल पा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जिन लोगों ने अपने बच्चों के विवाह के लिए बारात घर बुक कराए थे धन की कमी के कारण अधिकतरों ने बुकिंग भी कैंसिल करा दी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पांच सौ व एक हजार रुपए के नोटों को बंद करने के कदम का ग्रामीण स्वागत तो कर रहे हैं, लेकिन बैंकों और डाकघरों से पर्याप्त मात्रा में पैसा नहीं मिलने से वह परेशान भी हैं।
नोट बंदी का असर विकास कार्यों पर भी दिखाई देने लगा है। ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों पर लगे ठेकेदारों को बैंकों से पर्याप्त मात्रा में भुगतान नहीं मिलने से उन्हें कई परेशानियां झेलनी पड़ रही है। भुगतान नहीं मिलने से काम पर लगे अनेक मजदूरों ने अपने हाथ खड़े कर दिए हैं। हालात जल्दी नहीं संभले तो मजदूरों के सामने भुखमरी की नौबत आने की आशंका बनी है।
रविवार को बैंकों के साथ ही एटीएम के शटर भी डाउन रहे। करेंसी की कमी से जूझ रहे अन्य बैंकों के एटीएम तो बागेश्वर शहर में पहले से ही बंद चल रहे हैं रविवार को एसबीआई और बैंक ऑफ बड़ौदा के एटीएम से भी रुपए नहीं निकले। हालांकि एटीएम से रुपए निकलने के इंतजार में कई लोग कतार लगाकर खड़े रहे।
रावतसेरा गांव के योगेश रावत का कहना है कि बारातों में बेहतर सुविधा देने के लिए बैंक से कर्जा लेकर टैंट हाउस को संवारा है। बारातों की बुकिंग भी हुई है। ऐन वक्त पर नोट बंदी हो गई। इससे कुछ लोगों ने बुकिंग ही कैंसिल करा दी है। अधिकतर लोगों ने अब मंदिरों में विवाह कराने का मन बना लिया है। इस हालत में अब उनके सामने बैंक की किश्त डालने की समस्या है।
ट्रयांकोट निवासी भूतपूर्व सैनिक हयात मेहरा कहते हैं कि गांव से कांडा स्थित बैंक की दूरी 39 किमी जबकि बागेश्वर की दूरी 73 किमी है। वाहन पकड़ने के लिए आठ किमी की पैदल दूरी नापनी पड़ती है। बैंक में घंटों लाइन में खड़ा होने पर सिर्फ दो हजार रुपये ही मिल रहे हैं। दुकान से सामान लेने पर छोटे नोट भी वापस नहीं मिल पा रहे हैं। पैंसों के बगैर घर की दिनचर्या ही गड़बड़ा गई है।
पैठाण गांव निवासी लोकेश जोशी पंडिताई का काम करते हैं। बताते हैं कि यजमानों के पास पैंसे की कमी के कारण वह अपने बच्चों का विवाह शॉटकट में ही करने की सोच रहे हैं। पैंसे की कमी के कारण कर्म कांड भी कम ही हो रहे हैं। इससे आजीविका पर भी बुरा असर पड़ा है। छोटे नोट नहीं मिलने से समस्या और भी विकराल हो रही है।
20 बीजीएस 03पी: लोकेश जोशी
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खाती गांव निवासी ललित रावत का कहना है कि नोट बंदी का सीधा असर व्यापार पर पड़ रहा है। पहले हल्द्वानी और अन्य क्षेत्रों से इलाके में थोक व्यापारी आते थे और उधार पर सामान दे जाते थे। अब उनका आना कम हो गया है जो आ भी रहे हैं वह सामान उधार पर नहीं दे रहे हैं। क्षेत्र में एक भी बैंक की शाखा नहीं है।