बागेश्वर। महानगरों में रोजगार की तलाश में धक्के खाने वालों को सिरकोट के प्रकाश सनवाल की कहानी कइयों को प्रेरणा दे सकती है। प्रकाश ने भी कई महानगरों को रोजगार किया। वांछित सफलता नहीं मिलने पर घर लौटकर टैक्सी चलाई। आखिरकार उन्होंने बंजर पड़ रही पैतृक जमीन में खेती की शुरुआत की। कड़ी मेहनत और बुलंद इरादों के साथ की गई मेहनत रंग लाई और आज वह खेतीबाड़ी से आजीविका अर्जन करने के साथ दो युवकों को रोजगार भी प्रदान कर रहे हैं।
सिरकोट के पत्थरखानी निवासी 44 वर्षीय प्रकाश का जीवन संघर्ष भरा रहा। पढ़ाई करने के बाद वह भी अन्य युवाओं की तरह रोजगार करने निकल गए। दिल्ली, मुंबई जैसे महानगरों में आठ वर्ष तक धूल फांकी। जो रोजगार मिला, वह सिर्फ दो जून की रोटी जुटाने को होता था। थक हारकर वापस गांव लौट गए। गांव आने के बाद करीब 12 वर्ष तक टैक्सी चलाई। करीब पांच वर्ष पहले उनके गांव के लिए मोटर मार्ग का निर्माण हुआ तो उन्हें अपनी बंजर जमीन को आबाद करने का विचार आया। इसके बाद उन्होंने अपनी और चाचा-ताऊ की बंजर हो गई करीब 40 नाली जमीन को तैयार किया और अनाज, सब्जी का उत्पादन शुरू कर दिया। गांव में भरपूर पानी था, जिसका लाभ मिला। एक वर्ष में ही उन्हें अच्छी आमदनी होने लगी। जिसके बाद वह काम बढ़ाते चले गए। खेतीबाड़ी में उनकी पत्नी आशा देवी भी मदद करती हैं। उन्होंने मुक्तेश्वर (नैनीताल) के दो युवकों सुंदर प्रसाद और हरीश चंद्र को रोजगार भी प्रदान किया है।
25-30 हजार प्रति माह की हो रही कमाई
बागेश्वर। प्रकाश का कहना है कि खेतीबाड़ी से अधिक लाभकारी रोजगार कोई दूसरा नहीं है। उनके खेतों में चावल, गेहूं, गहत, भट, मसूर, आलू, टमाटर, प्याज, शिमला मिर्च, बैंगन, भिंडी, लौकी, कद्दू, तोरई सहित करीब सभी सब्जियों का उत्पाद हो रहा है। खेती से प्राप्त आय से वह 10-10 हजार रुपये कर्मचारियों को वेतन देते हैं। अन्य खर्चों को काटने के बाद उन्हें महीने में 25 से 30 हजार रुपये की कमाई हो रही है।
कारोबार आगे बढ़ाने का है लक्ष्य
बागेश्वर। प्रकाश ने बंदरों की परेशानी को देखते हुए वह खेती में तुलसी सहित अन्य औषधियुक्त पौधे उगाए हैं। उन्होंने अपने घर में मुुर्गी, बकरी और बतख रखी हैं। मछली पालन के लिए दो तालाब भी बनाए हैं। उद्यान विभाग की सहायता से उन्होंने दो पॉलीहाउस लगाए हैं।
मैंने खेती को व्यवसाय चुनने में काफी देर कर दी। पहाड़ में खेती और पशुपालन से बेहतर कोई रोजगार नहीं है। यहां के युवा इन कार्यों को लेकर उत्साहित नहीं है। अगर युवा महानगरों की दौड़ छोड़कर स्थानीय संसाधनों के उपयोग से स्वरोजगार करे तो बेहतर कमाई कर सकते हैं। - प्रकाश सनवाल, सिरकोट