नया शिक्षा सत्र शुरू होने में जहां विद्यालयों में छात्र संख्या बढ़ाने की बात हो रही है, वहीं सालमगड़ का जूनियर हाईस्कूल बंद होने के कगार पर पहुंच गया है। स्कूल में पढ़ने वाली एकमात्र छात्रा पासआउट हो गई है, जबकि शिक्षक भी सेवानिवृत्त हो गए हैं। गांव के एकमात्र प्राथमिक स्कूल में पांचवीं कक्षा में विद्यार्थी नहीं होने से नए प्रवेश होने की संभावना भी शून्य होने से इस स्कूल पर भी ताले लगने के आसार बन रहे हैं।
राजकीय जूनियर हाईस्कूल (राजूहा) सालमगड़ गरुड़ विकासखंड के सलखन्यारी ग्राम पंचायत में है। पलायन की मार झेल रहे इस गांव में कभी तीन प्राथमिक और एक जूनियर हाईस्कूल था। छात्र संख्या घटते रहने से दो प्राथमिक विद्यालय पहले की बंद हो चुके हैं। एकमात्र प्राथमिक विद्यालय में पांच विद्यार्थी पढ़ रहे हैं, जिनमें से तीन इस साल पांचवीं कक्षा में चले गए हैं। दो विद्यार्थी दूसरी और तीसरी कक्षा में गए हैं।
गांव का राजूहा पिछले दो साल से एक छात्रा के सहारे चल रहा था। उसे पढ़ाने की जिम्मेदारी उठा रहे शिक्षक नरेश पाल शनिवार को सेवानिवृत्त हो गए हैं। उन्होंने बताया कि तीन साल पहले तक विद्यालय में दो विद्यार्थी थे। दो साल पहले एक विद्यार्थी के पास होने के बाद विद्यालय में एकमात्र छात्रा भावना पढ़ रही थी। प्राथमिक स्कूल में इस साल कक्षा पांच में कोई विद्यार्थी नहीं था, जिसके कारण नए प्रवेश होने की संभावना भी नहीं है।
उन्होंने बताया कि विद्यालय में दो शिक्षक तैनात थे, जिनमें एक शिक्षिका व्यवस्था के तहत राप्रावि वज्यूला में अटैच थी। सेवानिवृत्त होने के बाद उन्हें विद्यालय का चार्ज सौंप दिया गया है।
छात्र संख्या शून्य होने पर विद्यालय को बंद कर संसाधन समीप के विद्यालय में शिफ्ट कर दिए जाएंगे। स्कूल की चाबी ग्राम प्रधान के पास रहेगी। अगले साल विद्यालय को छात्र मिले तो फिर से स्कूल में प्रवेश कराए जाएंगे। जब तक सरकार स्कूल को बंद नहीं करती, छात्र संख्या मिलने पर उसे फिर से खोला जा सकेगा।
- जीएस सौन, सीईओ बागेश्वर
मूलभूत सुविधाओं की तलाश में गांव से पलायन हो रहा है। जो लोग गांव में रहते हैं, वे भी अपने बच्चों को नगर के निजी स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। बेहतर शिक्षा की तलाश में बच्चों को बाहर भेजने के कारण पिछले पांच साल में दो प्राथमिक स्कूल बंद हो गए। अब जूनियर हाईस्कूल भी बंद होने के कगार पर है। वर्तमान में गांव में 70 से अधिक परिवार हैं, लेकिन अधिकतर घरों में बुजुर्ग या अधेड़ ही हैं।
- हरीश सिंह, ग्राम प्रशासक, सलखन्यारी