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हिमालयी क्षेत्र के गांवों को हंस पिला रहा पानी

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बागेश्वर के पिंडरघाटी के सोराग गांव में पानी आने से खिले लोगों के चेहरे। संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। हिमालयी क्षेत्र के अभावग्रस्त गांवों के लिए हंस फाउंडेशन किसी देवदूत से कम नहीं है। फाउंडेशन शिक्षा, ऊर्जा, फलोत्पादन आदि के क्षेत्र में इन गांवों की तस्वीर तो संवार ही रहा है, लोगों के लिए पेयजल का भी इंतजाम कर रहा है। अब तक प्राकृतिक स्रोतों पर निर्भर लोगों को अब घर-घर पानी मिल रहा है। फाउंडेशन पहले चरण में चार ग्राम पंचायतों के 586 परिवारों के लिए पेयजल योजनाएं बनाकर घर-घर पानी पहुंचा चुका है, जबकि दूसरे चरण में तीन ग्राम पंचायतों के लिए 24 योजनाओं का निर्माण किया जा रहा है।
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हिमालय की तलहटी में बसे होने के कारण पिंडरघाटी की 10 ग्राम पंचायतों में जलस्रोतों की प्रचुरता तो है लेकिन योजनाएं न बनने से लोग अब तक प्राकृतिक स्रोतों के पानी पर ही निर्भर थे। फाउंडेशन ने जनवरी 2019 में पिंडरघाटी के गांवों को पेयजल उपलब्ध कराने की योजना बनाई। फरवरी 2019 में बदियाकोट, कालों, सोराग और खाती ग्राम पंचायत के 586 परिवारों को पानी उपलब्ध कराने के लिए करीब छह करोड़ लागत की 70 छोटी-छोटी पेयजल योजनाओं का निर्माण शुरू किया। इन गांवों में अब पेयजल योजनाओं का काम पूरा हो गया है। तमाम परिवारों के साथ ही सरकारी स्कूलों में भी पेयजल कनेक्शन दिए गए हैं। पेयजल वितरण के लिए सभी गांवों में वितरण टैंक बनाए गए हैं। इनसे लोगों को 24 घंटे पानी मिल रहा है।
दूसरे चरण की योजना के तहत बोरबलड़ा, किलपारा, वाछम ग्राम पंचायतों के 424 परिवारों के लिए 2.25 करोड़ की लागत से 24 पेयजल योजनाओं का निर्माण कार्य चल रहा है। जल्द ही इन योजनाओं का कार्य पूरा हो जाएगा। दूसरे चरण की योजना के लिए हंस फाउंडेशन की पहल पर टाटा ट्रस्ट मुंबई ने भी आर्थिक सहयोग दिया है। पेयजल योजना न होने से ग्रामीणों को अब तक प्राकृतिक स्रोतों पर निर्भर रह कर दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। हंस फाउंडेशन की पहल पर चार ग्राम पंचायत के लोगों को अब घर-घर पानी मिल रहा है, जबकि तीन ग्राम पंचायतों के लोगों के लिए योजना पर काम शुरू हो गया है।
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तीन गांवों के लिए दो करोड़ लागत की छह योजनाएं प्रस्तावित
बागेश्वर। तीसरे चरण में कुंवारी, डौला और तीख ग्राम पंचायतों के लिए दो करोड़ की लागत से छह पेयजल योजनाओं का निर्माण होना है। प्रत्येक गांव में दो-दो योजनाओं का निर्माण किया जाएगा। इन योजनाओं के प्रस्ताव बना लिए गए हैं।
पेयजल योजनाओं का रखरखाव स्वच्छता समितियां करेंगी। प्रत्येक परिवार के शौचालय और स्नानागार में पेयजल कनेक्शन दिया गया है। योजनाओं के रखरखाव के लिए उपभोक्ताओं से 10 प्रतिशत अंशदान लिया गया है। इस रकम का उपयोग योजनाओं के रखरखाव में ही किया जाएगा।
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-एनबी अवस्थी, परियोजना कंसल्टेंट हंस फाउंडेशन।
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