कपकोट (बागेश्वर)। मानसून काल में ग्लेशियरों की यात्रा पर लगी रोक हट चुकी है। हालांकि रोमांच के शौकीनों के लिए ग्लेशियरों की सैर आसान होने वाली नहीं है। बारिश ने पिंडारी और सुंदरढूंगा मार्ग की हालत बिगाड़ दी है। कफनी रूट पर 2013 की आपदा के जख्म अब तक भरे नहीं जा सके हैं। पर्यटन विभाग अधिक से अधिक लोगों से ग्लेशियों की यात्रा करने की अपील कर रहा है, लेकिन रूट की हालत सुधारने पर कोई ध्यान नहीं है।
हर साल मानसून काल में 15 जून से 14 सितंबर तक ग्लेशियरों की सैर पर रोक रहती है। बारिश का दौर थमने के बाद यात्रा शुरू हो जाती है। इस साल जिले में औसत से अधिक बारिश होने का असर ग्लेशियरों के यात्रा मार्ग पर भी पड़ा है। संपर्क मार्ग जगह-जगह क्षतिग्रस्त हैं। कई जगह गड्ढे और फिसलन बनी हुई है। मार्ग क्षति के चलते इस सीजन में पर्यटन पूरी तरह प्रभावित होने की आशंका है। संवाद
साहसिक पर्यटन पर निर्भर है रोजगार
कपकोट। ग्लेशियर की सैर के लिए आने वाले ट्रैकरों और सैलानियों पर क्षेत्रवासियों का रोजगार निर्भर है। खाती, वाछम, जातोली गांवों के करीब 200 गाइड, पोर्टर, होम स्टे, हट संचालकों की आजीविका यहां आने वाले सैलानियों से ही चलती है। घोड़े-खच्चर संचालक और वाहन मालिक-चालकों को भी कमाई के लिए सैलानियों और ट्रैकरों का इंतजार रहता है।
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सुंदरढूंगा रूट पर जातोली से आगे सात किलोमीटर सिरई नाला, आठ किमी पर ठुलढूंगा और मोरखरिक पर रास्ता पूरी तरह से ध्वस्त है। बाकी जगहों पर भी कहीं पेड़ गिरे हैं तो कहीं पर रास्ता आंशिक क्षतिग्रस्त है। सुरक्षा दीवार भी जगह-जगह टूट चुकी हैं। वैकल्पिक अस्थायी मार्ग बनाए जाएं तभी इस रूट पर ट्रैकिंग सुचारू रह सकेगी।
दिनेश दानू, टूर गाइड, जातोली
द्वाली के पास पिंडर नदी में हर साल लकड़ी का अस्थायी पुल डाला बनाते थे, इस साल अब तक नहीं बना है। पिंडारी मार्ग के किमी छह से सात के बीच मे जगह-जगह भूस्खलन हुआ है। किमी 11 में भूस्खलन से करीब 100 मीटर रास्ता ध्वस्त है। किमी 14,15,19,23 और 25 में नाला आने से रास्ता ध्वस्त है। द्वाली से जीरो प्वाइंटर तक चेक डैम, रास्ते और दीवारों को काफी नुकसान हुआ है।
मान सिंह, होम स्टे संचालक, खाती
पिंडारी और सुंदरढूंगा का रास्ता बदहाल है। कफनी रूट पर 2013 की भीषण आपदा के बाद मरम्मत नहीं हो सकी है। द्वाली से खटिया तक रास्ता पूर्ण रूप से ध्वस्त है। क्षेत्र के पर्यटन को बचाने के लिए क्षतिग्रस्त व ध्वस्त रास्तों की जल्द मरम्मत करनी जरूरी है।
ध्यान सिंह, गाइड
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इस साल बारिश के कारण कई जगह मार्ग क्षतिग्रस्त हुए हैं। तीनों रूटों पर यात्रा मार्गों को व्यवस्थित करने का काम चल रहा है। द्वाली में पिंडर नदी पर अस्थायी पुलिया बनाने के निर्देश दे दिए हैं। जहां चट्टान में मार्ग संकरा है वहां कटिंग करने की निविदा लग चुकी है। जहां रास्ते की तत्काल मरम्मत संभव नहीं है, वहां वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है। - एके पटेल, ईई लोनिवि, बागेश्वर
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पिंडारी, सुंदरढूंगा और कफनी ग्लेशियर की यात्रा पर मानसून काल में रोक रहती है। अब मानसून का समय बीतने के साथ रोक हटा दी है। ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से भी सैलानियों को ग्लेशियरों की यात्रा शुरू होने की जानकारी दी जा रही है। - पीके गौतम, जिला पर्यटन अधिकारी, बागेश्वर