सामाजिक परंपरा की परवाह न करते हुए शामा गांव की दो सगी बहिनों ने अपने पिता की अर्थी को कंधा दिया और उनकी चिता मुखाग्नि दी। इन बेटियों के इस कार्य को लोगों द्वारा काफी सराहा जा रहा है।
शामा ग्राम पंचायत के भनेधार निवासी 52 वर्षीय लक्ष्मण सिंह कोरंगा क्षेत्र के सब्जी उत्पादक थे। वह पिछले कुछ समय से बीमार थे। बृहस्पतिवार की सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली। उनका इकलौता बेटा दिल्ली के किसी कंपनी में ऑडिटर के पद पर कार्यरत हैं। ऑडिट के काम से वह इन दिनों पश्चिम बंगाल गया है। परिजनों ने उन्हें इसकी सूचना दी। उन्होंने अंत्येष्टि में देर से पहुंचने की आशंका जताई।
लक्ष्मण सिंह की दो बेटियां है। बड़ी बेटी दया हल्द्वानी में एमएससी, बीएड करके कोचिंग कर रही है। छोटी बेटी रेखा का एमएससी का फाइनल चल रहा है। पिता के निधन की सूचना मिलने पर दोनों बेटियां बृहस्पतिवार की देर रात घर पहुंच गई। रात में ही दोनों ने विचार विमर्श कर तय किया उनके भाई के आने में देर होने से हर किसी को परेशानी होगी। ऐसे में उन्हें ही बेटे का धर्म निभाना चाहिए। उन्होंने ग्रामीणों को बताया कि वह दोनों अपने पिता की अर्थी को कंधा देेने के साथ-साथ चिता को मुखाग्नि भी देंगी।
उनके इस निर्णय पर शुक्रवार को सुबह मृतक की नगर पंचायत कपकोट स्थित खीरगंगा और सरयू के संगम तक शवयात्रा निकली। इन दोनों बेटियों ने पिता की अर्थी को कंधा दिया। इसके बाद घाट में पिता की चिता को मुखाग्नि देकर उन्हें अंतिम विदाई दी। विधायक ललित फर्स्वाण, पूर्व मंत्री बलवंत सिंह भौंर्याल , ब्लाक प्रमुख मनोहर राम, जिला पंचायत अध्यक्ष हरीश ऐठानी, पूर्व अध्यक्ष राम सिंह कोरंगा आदि ने लक्ष्मण सिंह कोरंगा के निधन पर शोक जताया है। उन्होंने इन दोनों बेटियों द्वारा किए गए कार्य को सराहनीय बताया।
दया और रेखा का कहना है कि अपने पिता की अर्थी को कंधा देने और उनकी चिता को मुखाग्नि देकर वह खुद को गौरवान्वित महसूस कर रही हैं। उन्होंने कहा कि माता पिता भगवान के समान होते हैं। उनके पिता ने अपने बच्चों की खुशहाली के लिए सारी जिंदगी लगा दी। उनकी अंतिम यात्रा में शामिल होना उनके लिए किसी गर्व से कम नहीं है।