बागेश्वर। आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति से गुदा रोगों का इलाज कराने वालों को अधिक भाग दौड़ नहीं करनी पड़ेगी। जिला अस्पताल की आयुष विंग में क्षार सूत्र विधि से इलाज की व्यवस्था हो गई है। ट्रामा सेंटर में स्थापित आयुष ओटी में एक महिला और एक पुरुष सर्जन मरीजों के ऑपरेशन के लिए तैनात किए गए हैं।
कुछ वर्षों में आयुर्वेद पद्धति से इलाज कराने वालों की संख्या बढ़ी है। जिले के नगर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक 35 आयुष अस्पताल हैं। इनमें जिला अस्पताल की आयुष विंग, 11 आयुष्मान आरोग्य मंदिर और 23 राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल के रूप में संचालित हो रहे हैं।
अब तक मजियाखेत के वेलनेस सेंटर में लोगों को क्षारसूत्र इलाज की सुविधा मिलती थी। अब आयुष विभाग ने इसका दायरा बढ़ाते हुए जिला अस्पताल की आयुष विंग में क्षारसूत्र सेवा शुरू करते हुए मरीजों को बड़ी राहत दी है।
कम खर्च में प्रभावी उपचार
क्षार सूत्र एक पारंपरिक आयुर्वेदिक शल्य चिकित्सा तकनीक है। इसका उपयोग भगंदर, बवासीर और फिशर जैसी गुदा संबंधी बीमारियों के इलाज में होता है। इसमें क्षार, हल्दी आदि आयुर्वेदिक औषधि लगे धागे की मदद से शल्य चिकित्सा या ऑपरेशन किया जाता है। इस विधि से मरीजों का कम खर्च में प्रभावी उपचार होता है।
कोट
जिला अस्पताल की आयुष विंग में क्षार सूत्र विधि से इलाज के लिए दो विशेषज्ञ डॉ. हेमा गोस्वामी और सुधीर आगरी को तैनात किया गया है। ओटी स्थापित होने के बाद एक ऑपरेशन किया जा चुका है। जिला अस्पताल की आयुष विंग में सुविधा शुरू होने के बाद अधिक लोगों को लाभ मिलेगा। डॉ. निष्ठा कोहली, जिला आयुर्वेदिक अधिकारी, बागेश्वर