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उम्र 110 वर्ष और जोश युवाओं जैसा

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टीकाकरण केंद्र से कोरोना टीका लगाकर आईं देवकी आमा। संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। संसार में बहुत कम लोग ऐसे भाग्यशाली होते हैं जिन्हें अच्छी सेहत, लंबी उम्र और खुुशहाल जीवन मिलता है। भिटारकोट गांव की शतायु आमा देवकी देवी को यह वरदान प्राप्त है। उम्र के 110वें वर्ष में भी देवकी आमा पूरी तरह से स्वस्थ हैं। जीवन के प्रति उनका आशावादी रवैया, नियमित दिनचर्या, संयमित खानपान और अनुशासित जीवन उनकी लंबी उम्र का राज है। वह अपनी लंबी उम्र को भगवान का आशीर्वाद मानती हैं और नाती-पोतों की शादी और उनके बच्चों को गोद में खिलाने तक जीवित रहना चाहतीं हैं।
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देवकी का जन्म वर्ष 1911 में गरुड़ विकासखंड के बाड़खेत गांव में हुआ था। उनका विवाह 12 वर्ष की उम्र में थाकला ग्राम पंचायत के भिटारकोट तोक निवासी हरी दत्त के साथ हुआ। उनकी तीन बेटियां हुईं। इनके नाम तुलसी देवी, लीला देवी और तुलसी देवी हैं। इनके 12 बच्चे हैं। उनके पति ने दूसरा विवाह भी किया था, जिनसे तीन पुत्र हैं। इनके नाम प्रेमबल्लभ कांडपाल, कृपाल दत्त कांडपाल और रमेश कांडपाल हैं। इनके सात बच्चे हैं। करीब 36 वर्ष पहले उनके पति का निधन हो गया था। देवकी को अपने सभी 19 नाती-पोतों से बेहद लगाव है। वह अपने नाती-पोतों की शादी और उनके बच्चों को बड़ा होना देखना चाहती हैं। भतीजे शंभू दत्त कांडपाल ने बताया कि उन्हें मतदाता दिवस पर चार बार सम्मानित किया जा चुका है। प्रशासन के लोग घर आकर उन्हें शॉल ओढ़ाकर जाते हैं। गुजारे के लिए उन्हें वृद्धावस्था पेंशन मिलती है।
सुबह पांच बजे शुरू हो जाती है दिनचर्या
बागेश्वर। देवकी देवी की दिनचर्या में कोई बदलाव नहीं आया है। वह रोजाना सुबह पांच बजे बिस्तर छोड़ देतीं हैं। वह नाश्ते में दो रोटी और सब्जी लेतीं हैं। दोपहर में रोटी या कभी-कभार थोड़ा चावल और रात के खाने में भी रोटी-सब्जी लेतीं हैं। इस उम्र में भी उनके दांत ठीक हैं। आंखों पर चश्मा चढ़ा है। हालांकि सुनाई कुछ कम देता है, लेकिन पास से बात करने पर सभी सुन लेती हैं। वह लाठी के सहारे आसानी से चल-फिर लेतीं हैं। करीब पांच महीने पहले वह पांच मील पैदल चलकर डाकखाने गई थी।
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अंग्रेजी शासन और स्वतंत्रता आंदोलन की है याद
बागेश्वर। शतायु देवकी देवी की याददाश्त पूरी तरह से दुरुस्त है। उन्हें अंग्रेजी शासन की याद है। उस समय उनके मायके बाड़खेत में एक बंगला था। जहां अंग्रेज अफसर आकर रुकते थे। अंग्रेजों के आने पर गांव वाले अनाज, फल, सब्जियां देने जाते थे। अंग्रेजों के पास काफी सुंदर घोड़े भी होते थे। उनको बांधने के लिए अलग से अस्तबल होते थे। वह बतातीं हैं कि महात्मा गांधी एक जीप में बैठकर गागरीगोल आए थे। उस समय गाड़ी देखना ही बड़ी बात होती थी। बापू के आने पर आजादी की आस लगाए लोगों में नया जोश भर गया था।
कोरोना का टीका लगाकर दिया संदेश
बागेश्वर। देवकी देवी ने शुक्रवार को कोरोना टीके की पहली डोज लगाई। गांव के दो बुजुर्गों के टीकाकरण के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव गई थी। टीका लगाने के बाद वह पूरी तरह से स्वस्थ हैं। क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. किशन सिंह राणा ने उन्हें मास्क, सैनिटाइजर भी बांटे।
मुख्यमंत्री हूं कुंछी, सौ साल हैगेईं अब तो पेंशन बढ़ै दिनां
बागेश्वर। देवकी देवी की इच्छा एक बार मुख्यमंत्री से मिलने की है। उन्हें लगता है कि सौ वर्ष पूरी करने वालों की पेंशन राशि समेत जरूरी सुविधाएं भी बढ़ाईं जानी चाहिए। कुछ दिन पूर्व मुुख्यमंत्री के बागेश्वर आने पर उन्होंने अपने बच्चों से मुख्यमंत्री से मिलवाने को कहा था। मुलाकात होने पर वह सीएम से यही मांग करतीं।
धन बड़ा और परिवार छोटे हो गए
बागेश्वर। देवकी आमा का कहना है कि पुराने जमाने में लोग एक-दूसरे का दुख-दर्द समझते थे। आपस में प्रेम व्यवहार था। गांव के सभी लोग सुख-दुख में शामिल होते थे लेकिन अब पूंजीवाद बढ़ने से अपने भी पराए होने लगे हैं। धन बड़ा हो गया है और परिवार छोटे हो गए हैं। भाई-भाई में प्रेम नहीं है। भाईचारा और अपनापन कम होने से दुख होता है।
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