बागेश्वर। कुमाऊं के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक उत्तरायणी मेले का औपचारिक समापन हो चुका है। मेले के दौरान नगर में सजी दुकानें अब सिमटने लगी हैं। लेकिन इस बार के मेले से व्यापारियों के चेहरों खास मुस्कान देखने को नहीं मिल रही है।
व्यापारियों का कहना है कि बढ़ते डिजिटल बाजार और ऑनलाइन शॉपिंग के क्रेज ने पारंपरिक मेलों के कारोबार पर गहरा प्रहार किया है। बीते वर्षों की तुलना में इस बार व्यापार में भारी गिरावट दर्ज की गई है। अब मेले के अंतिम बचे समय में व्यापारी खरीदारी बढ़ने की आस लगाए बैठे हैं।
मेले में कभी दूर-दराज से आए व्यापारियों का करोड़ों का टर्नओवर होता था। इस वर्ष स्थिति बदली हुई है। व्यापारियों का मानना है कि व्यापारिक गतिविधियां बढ़ने और घर बैठे मोबाइल से खरीदारी की सुविधा ने मेले के स्टालों की भीड़ को बाजार में तो बदला, लेकिन उसे खरीदारी में तब्दील नहीं कर पाए। कपड़ों से लेकर घरेलू सामान तक, हर सेक्टर में पिछले सालों की अपेक्षा काफी कम काम हुआ है। मुख्य मेला संपन्न हो चुका है, लेकिन व्यापारी अभी लौटे नहीं हैं। वे अंतिम एक-दो दिनों में होने वाली छिटपुट खरीदारी की उम्मीद में रुके हुए हैं। कई व्यापारियों ने अपने माल पर भारी छूट भी देना शुरू कर दिया है ताकि वे अपना स्टॉक कम कर सकें और खाली हाथ घर लौटने के बजाय कुछ पूंजी साथ ले जा सकें।
खड़िया खनन बंद होने से टूटा खरीदारी का चक्र
जिले की अर्थव्यवस्था में खड़िया खनन की बड़ी भूमिका रहती है। अमूमन सर्दियों के इन दिनों में खड़िया खानों में नेपाल मूल के हजारों श्रमिक काम करते थे। उत्तरायणी मेले के दौरान ये श्रमिक अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा कपड़ों, बर्तनों और घरेलू सामान की खरीदारी में खर्च करते थे। इस साल खनन कार्य बंद होने से ये श्रमिक जिले में नहीं पहुंचे। जिसका सीधा असर मेले के कारोबार पर पड़ा है।
भीड़ से गुलजार रहा मेला, पर खरीदारी में कंजूसी
मेला क्षेत्र में मेलार्थियों की जमकर भीड़ उमड़ी अब भी ग्रामीण क्षेत्रों के लोग मेले में पहुंच रहे हैं। लेकिन यह भीड़ व्यापारियों की झोली भरने में नाकाम साबित हो रही है। व्यापारियों का कहना है कि लोग सामान देखकर भाव पूछ रहे हैं लेकिन डिजिटल विकल्पों से तुलना करने के बाद बिना खरीदारी किए आगे बढ़ रहे हैं। मेले में घूमने आई भीड़ मोल-भाव तक ही सीमित रह गई है। इससे दुकानदार खाली बैठे हैं।