बागेश्वर। सिंचाई विभाग से बार-बार गुहार लगाने के बाद भी तीन साल पहले आपदा में क्षतिग्रस्त नहर की मरम्मत नहीं होने पर दुलम के ग्रामीणों ने स्वयं ही नहर की मरम्मत कर पानी सुचारु कराया। ग्रामीणों ने नहर के टूटे हिस्सों पर पत्थरों की मदद से कामचलाऊ जोड़ लगाए और किसी तरह से पानी खेतों तक पहुंचाया। किसानों ने विभाग की ओर से की जा रही अनदेखी पर नाराजगी भी जताई।
दुलम गांव की करीब दो हजार की आबादी में अधिकतर लोग खेतीबाड़ी से जीवन यापन करते हैं। गांव के लिए करीब 25 वर्ष पहले गाड़ाखरक पेयजल स्रोत से तीन किमी लंबी सिंचाई नहर का निर्माण किया गया था। नहर का लाभ करीब 125 किसान परिवारों को मिलता है। तीन साल पहले आपदा के समय नहर टूट गई थी। इसके बाद से ग्रामीण विभाग से नहर की मरम्मत की लगातार गुहार लगाते आ रहे हैं। पिछले वर्ष भी ग्रामीणों ने सिंचाई के लिए स्वयं ही नहर की कामचलाऊ मरम्मत कर काम चलाया था। इस वर्ष भी जब विभाग की ओर से उनकी मांग पर गौर नहीं किया गया तो ग्रामीण खुशाल सिंह, भूपाल सिंह, विजय कोरंगा, बंटी कोरंगा, अमर सिंह, सुरेंद्र सिंह, राजेंद्र सिंह आदि ने रविवार से नहर की मरम्मत का काम शुरू किया और मंगलवार सुबह खेतों तक पानी पहुंचाया। ग्रामीणों ने कहा कि नहर की मरम्मत में काफी खर्चा है। ग्रामीण मामूली रूप से मरम्मत कर पा रहे हैं, जिससे सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीणों ने विभाग से जल्द नहर की मरम्मत करने की मांग की।
दुलम गांव के सिंचाई नहर की मरम्मत और सफाई के निर्देश एई को दे दिए गए हैं। जल्द ही नहर को दुरुस्त करा दिया जाएगा। - एके जॉन, ईई सिंचाई विभाग