गरुड़-चौखुटिया मोटर मार्ग का निर्माण पिछले 24 साल से अधर में लटका है। गरुड़ से सिमपुर और चौखुटिया से तड़ागताल तक सड़क का निर्माण हो चुका है। बीच के नौ किमी हिस्से की फाइल केंद्रीय वन मंत्रालय में धूल फांक रही है। सड़क का निर्माण होने पर गरुड़ से चौखुटिया की दूरी 50 किमी कम होकर महज 25 किमी हो जाएगी। इस सड़क के बनने से प्रदेश की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण और रामनगर का सफर भी कम हो जाएगा।
उत्तराखंड राज्य बनने के पहले से ही गरुड़ से चौखुटिया तक सड़क बनाने की योजना थी। योजना को धरातल पर उतारने का प्रयास भी किया गया, लेकिन अब तक इसे पूरा नहीं किया जा सका है। सिमपुर से तड़ागताल के बीच बांज, फल्याट और बुरांश का घना वन है। चौड़ी पत्तीदार प्रजाति के सैकड़ों पेड़ इस क्षेत्र में होने से अब तक वन भूमि हस्तांतरण की अनुमति नहीं मिल सकी है। वर्तमान में गरुड़ से चौखुटिया जाने के लिए 75 किमी की दूरी तय करनी पड़ती है। इसे पूरा करने में साढ़े तीन से चार घंटे का समय लगता है, जबकि इस सड़क के बनने से सफर महज एक घंटे का रह जाएगा।
इन गांवों को मिलेगा लाभ
सत्ता में मजबूत भागीदारी का मिलेगा लाभ
गरुड़-चौखुटिया सड़क के निर्माण की मांग काफी पुरानी है। इस सड़क के बनने से बागेश्वर और अल्मोड़ा दोनों जिलों के लोगों को लाभ मिलेगा। दो बार केंद्रीय वन मंत्रालय की टीम सड़क का निरीक्षण भी कर चुकी है। उम्मीद है सरकार जल्द इस समस्या का निदान करेगी।- मंगल सिंह राणा, ग्रामीण, कोटतुलारी, गरुड़
देवनाई घाटी और गेवाड़ घाटी एक दूसरे से जुड़े हैं। दोनों घाटियों के बीच रोटी-बेटी का रिश्ता है। पहले से गेवाड़ घाटी में लोग पशुओं को लेने भी यहां पैदल आते थे। सड़क बनने से पुराने संबंधों में फिर से मजबूती आएगी।- भगवती देवी, ग्रामीण, भगरतोला, गरुड़
पहले जमाने में लोग इसी रास्ते से पैदल आवाजाही करते थे। लोगों ने पैदल चलना छोड़ा तो आवाजाही भी कम हो गई। इस रोड के बनने से पहले की तरह ग्रामीण कारोबार को बल मिलेगा।- उदय सिंह, ग्रामीण, महलचौंरी, चौखुटिया
गरुड़-चौखुटिया सड़क के वन भूमि अधिनियम के चलते निर्माण कार्य अटका हुआ है। बाकी सड़क के निर्माण के लिए जमीन की तलाश की जा रही है। जल्द समस्या का निदान होने की उम्मीद है।- एसके पांडेय, ईई, लोनिवि बागेश्वर