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अभिभावकों के लिए चुनौती से कम नहीं होता नया शिक्षा सत्र 

Tue, 05 Apr 2016 10:25 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, बागेश्वर।
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पढ़ाई - फोटो : अमर उजाला
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समय के साथ-साथ पढ़ाई भी महंगी होती जा रही है। बच्चों की बेहतर शिक्षा ही हर व्यक्ति का सबसे पहला लक्ष्य होता है। अप्रैल का महीना शुरू होते ही नई कक्षाओं में बच्चों के एडमिशन शुरू हो जाते हैं। ऐसे में एडमिशन फीस से लेकर बच्चों की नई किताबें, ड्रेस सहित अन्य खर्चे मेंटेन करना लोगों के लिए आसान नहीं होता है।

सामान्य इनकम वाले परिवारों के लिए नया शिक्षा सत्र चुनौती से कम नहीं होता है। जब मौजूद पढ़ाई और खर्चों को लेकर महिलाओं से बातचीत की गई तो कुछ महिलाओं का कहना था कि बच्चे के बेहतर भविष्य को देखते हुए उन्हें घर के अन्य खर्चों में कटौती करनी पड़ती हैं। 
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आज की शिक्षा व्यवस्था काफी महंगी हो गई है। सामान्य आमदनी वाले परिवारों के लिए बच्चों को अच्छी शिक्षा देना आसान नहीं है। बच्चों की पढ़ाई के खर्चे मुश्किल से जुटाने पड़ते हैं। फीस हर साल पिछले साल की तुलना में बढ़ जाती है। किताबें भी हर साल बदल दी जाती हैं।  
 - पुष्पा तिवाड़ी। 

बच्चों की पढ़ाई दिनों दिन महंगी होती जा रही है। बच्चों की फीस में हर साल बढ़ोतरी हो रही है। हर साल नया पैटर्न चेंज होने से नई किताबें खरीदनी पड़ती हैं। पैटर्न हर बार चेंज कर दिया जाता है, जबकि सरकारी स्कूलों में आगे जाने वाले बच्चे की किताबें उनके छोटे भाई-बहन के काम आ जाती हैं। 
 - कविता मिश्रा। 
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हर माता-पिता की यही इच्छा रहती है कि उसका बच्चा अच्छे से अच्छे स्कूल में पढ़े। लेकिन प्राइवेट स्कूलों की फीस हर साल बढ़ती जाती है। इन स्कूलों में फीस से लेकर कॉपी-किताबें तक सब हर बार महंगी हो जाती हैं। 
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- नंदी परिहार। 

प्राइवेट स्कूलों में समान फीस होनी चाहिए। शिक्षा के क्षेत्र में मनमानी पर रोक लगनी चाहिए। एडमिशन शुल्क और हर माह की फीस के साथ ही कॉपी-किताब भी सस्ती होने चाहिए। बच्चों की पढ़ाई के लिए घर के खर्चों में कटौती करनी पड़ती है। 
- कुंती देवी। 
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