बागेश्वर। आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए भले ही सरकार तमाम दावे कर रही हो लेकिन धरातल के हालात कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। कोरोना काल के बाद लोगों का रुझान आयुर्वेद की तरफ बढ़ा है लेकिन आयुर्वेदिक अस्पतालों में सुविधाओं और संसाधनों का अभाव है। हालात ये हैं कि जिले के कई अस्पतालों ने आज तक डॉक्टरों के दर्शन तक नहीं किए हैं।
कोरोना महामारी से लड़ने के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की बात शुरू हुई तो लोगों का रुझान भी आयुर्वेदिक उत्पादों की तरफ बढ़ा। इन दिनों आयुर्वेदिक उत्पादों का जमकर इस्तेमाल किया जा रहा है। चाहे वह आयुर्वेदिक दवाइयां हो या नुस्खे लोगों ने आयुर्वेद पर जोर दिया है। जिले के आयुर्वेदिक अस्पतालों में लोगों की भीड़ देखने को मिल रही है। हालांकि कई आयुर्वेदिक अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी के कारण लोगों को उचित इलाज नहीं मिल पा रहा है। अस्पतालों में डॉक्टरों की तैनाती न होने से लोगों में निराशा है।
36 डॉक्टरों में से 20 पद खाली
बागेश्वर। जिले में 18 आयुर्वेदिक अस्पताल हैं। जिनके लिए डॉक्टरों के 36 पद स्वीकृत हैं। वर्तमान में मात्र नौ पदों पर नियमित और सात संविदा डॉक्टर ही नियुक्त हैं। 20 डॉक्टरों के पद अब भी खाली चल रहे हैं। ऐलोपैथिक डॉक्टरों की कमी के बाद आयुर्वेदिक डॉक्टरों की भी कमी लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रही है। बीमारी को जड़ से खत्म करने के लिए लोग आयुर्वेदिक इलाज को प्राथमिकता देते हैं, लेकिन डॉक्टरों की कमी से उन्हें सटीक इलाज नहीं मिल पा रहा है।
इन अस्पतालों में तैनात हैं डॉक्टर
बागेश्वर। जिले में कुल 18 आयुर्वेदिक अस्पताल हैं। इनमें जिला अस्पताल के आयुष विंग में दो डॉक्टर तैनात हैं। इसके अलावा चामी, चौरा, कन्यालीकोट, मजियाखेत, लौबांज, रातिरकेटी और जखेड़ा में नियमित डॉक्टरों की तैनाती की गई है। सात संविदा डॉक्टर नियुक्त किए गए हैं। 20 डॉक्टरों की लंबे समय से नियुक्ति नहीं हो सकी है। कई अस्पताल फार्मासिस्टों के भरोसे चल रहे हैं। वहीं जिला आयुर्वेद एवं यूनानी अधिकारी और दो वरिष्ठ चिकित्साधिकारियों के पद भी रिक्त चल रहे हैं।
आयुर्वेदिक अस्पतालों में डॉक्टरों की तैनाती के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। निदेशालय को इस बारे में सूचित किया जा चुका है। संविदा डॉक्टर भी तैनात किए जा रहे हैं। - डॉ. राघवेंद्र गुप्ता, प्रभारी जिला आयुर्वेद एवं यूनानी अधिकारी।