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दस साल बाद ईपीएफ की धनराशि का हुआ भुगतान

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कौसानी/बागेश्वर। अमर उजाला की खबर का एक बार फिर असर हुआ है। अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद चाय बागान की श्रमिक को ईपीएफ की धनराशि का 10 साल बाद भुगतान हो गया है।
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कौसानी निवासी विमला कांडपाल कौसानी के चाय बागान में काम करतीं थीं। उन्होंने वर्ष 2010 में काम छोड़ दिया। काम छोड़ने के बाद से वह ईपीएफ की धनराशि के भुगतान के लिए उत्तराखंड चाय बोर्ड से पत्राचार कर रहीं थीं लेकिन उनको ईपीएफ की धनराशि का भुगतान नहीं किया गया। इस मामले में अमर उजाला ने पांच अगस्त के अंक में पीएफ राशि के लिए भटक रही है चाय बागान की श्रमिक शीर्षक से प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद हरकत में आए विभाग ने महिला के बैंक खाते में ईपीएफ की धनराशि का भुगतान कर दिया है। महिला के पति गोपाल दत्त कांडपाल ने बताया कि एक सप्ताह पहले उन्हें बैंक खाते में लगभग 26 हजार रुपये की धनराशि जमा करने की सूचना मिली है। उन्होंने ईपीएफ की धनराशि दिलाने में अमर उजाला की अहम भूमिका बताते हुए आभार जताया है।
अन्य कर्मचारियों के लिए भी खुली राह
कौसानी। कौसानी चाय बागान में कार्य करने वाले तमाम कर्मचारियों को ईपीएफ की धनराशि का भुगतान नहीं हुआ है। बीते 4 सितंबर के अंक में अमर उजाला ने चाय बागान में काम करने वाले स्वर्गीय चंद्र बल्लभ पाठक की पत्नी मुन्नी पाठक को ईपीएफ की धनराशि का भुगतान न होने का मामला प्रमुखता से उठाया था। बताया जा रहा है कि इस मामले में भी भुगतान की कार्यवाही हो रही है। कौसानी के सामाजिक कार्यकर्ता सेवानिवृत्त प्रवक्ता गोपाल दत्त कांडपाल ने बताया कि चाय बागान बोर्ड ने आठ मृतक कर्मचारियों और 20 सेवानिवृत्त कर्मचारियों के ईपीएफ का भुगतान नहीं किया है। वह लगातार इस मामले में पत्राचार कर रहे हैं। इन लोगों की लड़ाई भी लड़ी जाएगी।
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