बागेश्वर। जिले के राजकीय प्राथमिक विद्यालयों में फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर नौकरी हथियाने वाले 10 शिक्षकों पर गाज गिर चुकी है। रामनगर बोर्ड से कराए गए दस्तावेज के सत्यापन में प्रमाणपत्र फर्जी और कूट रचित पाए जाने के बाद विभाग ने इन सभी शिक्षकों की सेवा तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी है।
लंबे समय तक फर्जी दस्तावेज के सहारे इन शिक्षकों के दुर्गम और ग्रामीण क्षेत्रों के नौनिहालों को पढ़ाए जाने से प्राथमिक शिक्षा के स्तर को भारी नुकसान पहुंचा है। स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों में इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है कि आखिर नियुक्ति के समय विभागीय अधिकारियों ने दस्तावेज का सही ढंग से सत्यापन क्यों नहीं किया। लोगों की मांग है कि सिर्फ सेवा समाप्ति की कार्रवाई काफी नहीं है बल्कि फर्जी शिक्षकों से अब तक दिए गए वेतन की पूरी वसूली की जानी चाहिए। लोगों ने कहा उनके खिलाफ सख्त आपराधिक मुकदमे दर्ज हों और लापरवाही बरतने वाले तत्कालीन अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। संवाद