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अंगूठा लगाओ और राशन लो

Fri, 14 Oct 2016 10:53 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो बागेश्वर
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बागेश्वर में बायोमैट्रिक पॉस मशीन के साथ सस्ता गल्ला विक्रेता। - फोटो : amar ujala
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 सरकारी राशन की दुकानों में अब पॉश मशीन में अंगूठा लगाने के बाद ही राशन मिलेगा। शासन की ओर से ट्रायल के तौर पर पहले चरण में प्रदेश के सभी 13 जिलों में दो-दो पॉस (प्वाइंट आफ सेल) मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं। इनका ट्रायल देखने के बाद धीरे-धीरे सभी सस्ता गल्ला की दुकानों में यह मशीनें लगा दी जाएंगी। खास बात यह है कि यह बायोमेट्रिक पॉस मशीन केवल आधार नंबर वाले उपभोक्ताओं को ही राशन देगी।  
अभी तक सरकारी राशन की दुकानों में खाद्यान्न सेल का रिकार्ड मैनुअल दर्ज किया जाता था। इसके तहत यूनिट के हिसाब से राशन नहीं मिलने या कालाबाजारी करने की शिकायतें मिलती रहती थीं। खाद्यान्न वितरण प्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए सस्ता गल्ला की दुकानों में पॉस मशीनें लगाने का काम शुरू हो गया है।
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इस मशीन में एक सिम कार्ड लगेगा। इससे मशीन इंटरनेट से जुड़ी रहेगी। पहले चरण में सभी जिलों को पायलट प्रोजेक्ट के तहत दो-दो मशीनें दी गई हैं।  इन मशीनों की रिपोर्ट मिलने के बाद शासन से अन्य सस्ता गल्ला की दुकानों में भी मशीनें दी जाएंगी। राशन के लिए कार्ड धारक या कार्ड में दर्ज किसी भी सदस्य को मशीन में बने थंब प्वाइंट पर  अंगूठा लगाना होगा। इसके बाद ही कार्ड धारक को राशन मिलेगा। कार्ड धारक को मशीन से राशन की प्रिंटेड स्लिप भी मिलेगी।

इस मशीन के लगने से पूर्ति विभाग के अधिकारी हर दुकान में होने वाले राशन वितरण पर नजर रख सकेंगे। इस व्यवस्था से राशन वितरण में धांधली की कोई गुंजाइश नहीं रहेगी। बागेश्वर के डीएसओ जसवंत कंडारी ने बताया कि शासन से अभी दो पॉस मशीनें मिली हैं। जिले को मिली दोनों मशीनों को स्टॉल कर दिया है। निर्देशों के तहत मशीन से होने वाले खाद्यान्न वितरण संबंधी पूरा ब्यौरा शासन को भेजा जाएगा।
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 गांवों में कैसे होगा संचालन
बागेश्वर। सस्ता गल्ला की दुकानों में पॉस मशीनें लगाने के प्रोजेक्ट पर काम तो शुरू हो गया है, लेकिन इसमें सबसे बड़ी बाधा यह है कि उत्तराखंड राज्य के पर्वतीय जिलों में सभी ग्रामीण क्षेत्र अभी संचार सुविधा के दायरे में नहीं हैं। ऐसे में जिन गांवों में मोबाइल नेटवर्क काम नहीं करता वहां की सस्ता गल्ला दुकानों का डेटा कैसे ऑनलाइन होगा, यह बड़ा सवाल है। हालांकि विभागीय अधिकारियों के अनुसार नॉन कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों में सस्ता गल्ला विक्रेता मशीन से ऑफलाइन काम करेंगे। इसके बाद सप्ताह या महीने में पूूरा डाटा एक साथ ऑनलाइन कर दिया जाएगा। 
 
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