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डुंगरगांव में सड़क के लिए संघर्ष

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बागेश्वर के डुंगरगांव में अमर उजाला आपके द्वार कार्यक्रम में समस्या बताते लोग। संवाद न्यूज एजें - फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। कारगिल युद्ध में शहीद हुए रमेश सिंह परिहार का गांव डुंगरगांव आज भी सड़क सुविधा से वंचित है। यहां के लोगों ने सड़क सुविधा के लिए चुनाव बहिष्कार से लेकर अनशन तक किए लेकिन सड़क नहीं बनी। परेशान ग्रामीण पलायन करने के मजबूर हैं। गांव का एकमात्र विद्यालय छात्र संख्या शून्य होने के कारण बंद हो चुका है। स्वास्थ्य सुविधाओं का भी अभाव है। शासन-प्रशासन की उपेक्षा से ग्रामीणों में भी रोष बढ़ रहा है।
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‘अमर उजाला आपके द्वार’ कार्यक्रम के तहत मंगलवार को संवाद न्यूज एजेंसी की टीम जिला मुख्यालय से 10 किलोमीटर की दूरी पर बसे गांव डुंगरगांव पहुंची। ग्रामीणों ने बताया कि गांव की मुख्य समस्या सड़क का नहीं होना है, जिसकी वजह से लगातार पलायन हो रहा है। कारगिल शहीद जांबाज रमेश सिंह परिहार के नाम पर मोटर मार्ग बनाने की घोषणा सरकार ने की थी। वर्ष 2007-08 में रुनीखेत से खोली-अमतोड़ा-बेल्ता होते हुए डुंगरगांव-मजबे-दाड़िमठौक मोटर मार्ग का निर्माण शुरू कराया गया। एक किमी कटान के बाद निर्माण कार्य ठप पड़ गया। काम रुकने के बाद ग्रामीणों ने विरोध-प्रदर्शन किए। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव का बहिष्कार भी किया।
तीन गांव नैल, डुंगरगांव और मजबे के बूथ में एक भी वोट नहीं पड़ा। वर्ष 2013-14 फिर से सड़क का काम शुरू हुआ और छह किमी तक निर्माण किया गया। बेल्ता तक निर्माण के बाद सड़क निर्माण फिर ठप पड़ गया। वर्ष 2016 में ग्रामीणों ने गांव में अनशन किया। इसमें शहीद की पत्नी पुष्पा देवी और बेटा सूरज भी शामिल हुए। इसके बावजूद सड़क का निर्माण अधर में लटका है। ग्रामीण खीम सिंह परिहार, उमेद सिंह परिहार, नीमा देवी, राधिका देवी, हेमा देवी, चंपा देवी ने गांव की अन्य समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया।
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क्या कहते हैं लोग
जिलाधिकारी से लेकर विधायक के कई बार चक्कर काटने के बाद भी मोटर मार्ग का निर्माण पूरा कराने की मांग अधर में लटकी है। सुविधाओं के अभाव में गांव से पलायन चरम पर है। लोगों की उम्मीद भी टूटने लगी है। - ललित मोहन सिंह परिहार, ग्राम प्रधान डुंगरगांव
गांव में गाड़ी देखने की आस में बुढ़ापा भी गुजरता जा रहा है। मोटर मार्ग तो छोड़ो गांव के लिए अच्छा पैदल रास्ता भी नहीं बन सका। दूर-दराज के गांवों में भी गाड़ी जाने लगी है। जिला मुख्यालय के नजदीकी गांव की उपेक्षा की जा रही है। - कुंती देवी, ग्रामीण
डुंगरगांव में राशन की दुकान नहीं है, स्वास्थ्य की सुविधाएं का भी अभाव है। लोगों को पांच से छह किमी दूर पैदल जाकर राशन लाना पड़ता है। परेशानियों को देखते हुए संपन्न लोग गांव छोड़ रहे हैं। - आनंदी देवी, ग्रामीण
जिला मुख्यालय से मात्र 10 किमी की दूरी के गांव से आज भी मरीजों को डोली पर ले जाना पड़ता है। पलायन के चलते गांव का एकमात्र प्राथमिक स्कूल बंद हो गया है। मजबूर बुजुर्ग और गरीब लोग परेशानी में जीवन गुजार रहे हैं। - खीम सिंह, ग्रामीण
कार्यक्रम में ये समस्याएं भी उठीं
-गांव में बंदर और जंगली सुअर के आतंक से खेतीबाड़ी प्रभावित हो रही है। लोग कृषि कार्य से दूर होते जा रहे हैं। घरों के आसपास सब्जी लगाना भी मुश्किल हो गया है।
-गांव में स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव है। नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र भी पांच किमी दूर है। मरीजों को जिला अस्पताल ले जाने के लिए दिक्कत उठानी पड़ती है।
-गांव को जोड़ने वाले पैदल रास्ता भी बदहाल है। ग्रामीण किसी तरह से जोखिम उठाकर गांव तक पहुंचते हैं। बाजार से भारी सामान कंधे या सिर पर रखकर लाने में अधिक परेशानी होती है।
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-गांव में सस्ते गल्ले की दुकान नहीं होने से लोगों को रोजमर्रा के कामकाज छोड़कर राशन लेने के लिए जाना पड़ता है।
जनता की राय
-गांव के लिए जल्द से जल्द मोटर मार्ग का निर्माण किया जाना चाहिए।
-गांव में एक सस्ते गल्ले की दुकान खोली जानी चाहिए।
-गांव में स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराई जानी चाहिए।
- बंदरों और जंगली सुअरों के आतंक से लोगों को निजात दिलाने के लिए ठोस उपाय होने चाहिए।
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